'मतभेद न बने विवाद', ब्रिक्स बैठक से इतर जिनपिंग से बोले मोदी
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई लगातार प्रगति का स्वागत किया।
उन्होंने इस बात को दोहराया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नज़रिए से देखना चाहिए। मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन आपसी बातों- आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित- का पालन करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास का एक जरूरी आधार है। उन्होंने सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और समझ का पालन करने की दोनों पक्षों की ज़रूरत पर जोर दिया।
ब्रिक्स घोषणा पत्र में कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली घोषणापत्र को अपनाने का प्रस्ताव रखा, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की गई है। घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आह्वान किया गया।
आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का आह्वान
दिल्ली घोषणा में कहा गया कि किसी भी उद्देश्य, कहीं भी और किसी के द्वारा किए गए आतंकवादी कृत्य आपराधिक और अनुचित हैं तथा उनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। इसमें 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। घोषणा पत्र में आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबला करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के ‘हर घर जल’ के दावे दूषित पानी में बह गए: खड़गे
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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुजरात में पेयजल की स्थिति को लेकर शनिवार को बीजेपी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “हर घर जल” के दावे दूषित पानी में बह गए हैं।
गुजरात में 10 में से 9 नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए
खड़गे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि गुजरात में 10 में से करीब नौ नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान शुरू की गई ‘सुजलाम-सुफलाम’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2004 में इसका जोर-शोर से प्रचार किया गया था, लेकिन आज भी राज्य के कई हिस्सों में लोग पानी के लिए परेशान हैं।
14 लाख घर अब भी पानी के इंतजार में
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद इसी तरह के दावों को ‘जल जीवन मिशन’ के माध्यम से आगे बढ़ाया गया।
फ्रीबी कल्चर ने लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया है:शिवसेना (यूबीटी)
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मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को चुनाव के समय मुफ्त तोहफे बांटने की बढ़ती ग्लोबल संस्कृति की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित "ट्रंप डिविडेंड" योजना और भारत में राजनीतिक पार्टियों द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं के बीच समानताएं बताईं।
शिवसेना (यूबीटी) ने की ट्रंप और मोदी की राजनीति की तुलना
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में छपे एक संपादकीय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने आरोप लगाया कि अमेरिका में ट्रंप और भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बढ़ावा दिए गए "मुफ्त की चीजें बांटने के कल्चर" (फ्रीबी कल्चर) ने लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया है और इंसानी गरिमा को नुकसान पहुंचाया है।
संपादकीय में कहा गया है कि जहां भारत में "लाडकी बहिन" और राज्यों में इसी तरह के कल्याणकारी कार्यक्रम चल रहे हैं। वहीं, अगर रिपब्लिकन कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो हर वयस्क अमेरिकी के बैंक खाते में 5,000 डॉलर जमा करने का ट्रंप का प्रस्ताव भी चुनाव के समय लुभाने वाला कदम ही है।
दिल्ली पहुंचे राष्ट्रपति जिनपिंग,गलवान संघर्ष के बाद का पहला भारत दौरा
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नई दिल्ली: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे। यह लगभग सात वर्षों में उनकी भारत की पहली यात्रा है। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद शी जिनपिंग का पहला भारत दौरा है और दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से जारी राजनयिक सुधार की प्रक्रिया के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन 2020 की घातक गलवान झड़पों के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना एक जरूरी शर्त है।
हाल ही में बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट के दौरान पीएम मोदी और शी के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई थी। अब उम्मीद है कि दोनों नेता ब्रिक्स समिट के दौरान विस्तृत द्विपक्षीय चर्चा करेंगे।
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