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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के 'शुद्धीकरण' वाले मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा को पत्र लिखा है। इस पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष ने जेपी नड्डा से आग्रह किया है कि वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को निर्देशित कर ‘शुद्धीकरण’ की घटना में शामिल व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराना सुनिश्चित करें। 

बता दें कि, बीते आठ अगस्त को उत्तराखंड में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की एक सभा हुई थी और इसके बाद कुछ लोगों ने सभास्थल का कथित तौर पर शुद्धीकरण किया था। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसा करने वाले बीजेपी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोग हैं। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में कहा, ‘‘राज्यसभा में दिए गए आश्वासन के आलोक में आप उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को निर्देशित करते हुए यह सुनिश्चित करें कि हल्द्वानी में मेरी जनसभा के बाद रामलीला मैदान पर शुद्धीकरण की इस घटना में संलिप्त व्यक्तियों और संगठनों पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए।’’

खड़गे ने कहा कि हल्द्वानी में कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धीकरण’ का मुद्दा 13 अगस्त, 2026 को राज्यसभा में उठाया गया था और उस दौरान नड्डा ने सदन में खड़े होकर कहा था कि ‘‘जो भी बात हुई है, उसकी जांच जरूर होगी’’ और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खड़गे ने पत्र में नड्डा द्वारा सदन में दिए गए आश्वासन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने यह भी कहा था, ‘‘इस तरह के कृत्य का भारतीय जनता पार्टी कभी भी समर्थन नहीं करती है। मैं इसकी भर्त्सना करता हूं और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी इसे गहराई से देखेंगे।’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि घटना के 24 दिन बीत जाने के बाद भी संबंधित संगठन और व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकरण की सबसे आपत्तिजनक बात यह थी कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान के उस स्थल पर, जहां मैंने रैली को संबोधित किया, वहां पर भारत के संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के विपरीत शुद्धीकरण कराया गया।’’

खड़गे ने कहा कि ‘शुद्धीकरण’ की ऐसी प्रक्रिया को आमतौर पर छुआछूत से जोड़ा जाता है। उन्होंने 1927 के 'महाड़ आंदोलन' का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा तालाब से पानी पीने के बाद जातीय दंभ से भरे लोगों ने ‘‘108 घड़े गोमूत्र और गोबर डाल कर मंत्रोच्चार के साथ शुद्धीकरण किया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मंत्रोच्चार या हवन करने से शुद्धीकरण की जातिवादी प्रक्रिया पावन नहीं हो जाती है।’’

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