बेंगलुरु: कप्तान तिलक वर्मा के नाबाद अर्धशतक से दक्षिण क्षेत्र ने दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल के चौथे और अंतिम दिन बुधवार को यहां उत्तर क्षेत्र पर सात विकेट की जीत के साथ फाइनल में जगह बनाई। उत्तर क्षेत्र के 181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण क्षेत्र ने तिलक (नाबाद 51) और रविचंद्रन स्मरण (नाबाद 32) ने बीच चौथे विकेट के लिए 80 रन की अटूट साझेदारी से जीत हासिल की। दक्षिण क्षेत्र ने दूसरे सत्र के आखिर में तीन विकेट पर 182 रन बनाकर जीत दर्ज की। अब छह सितंबर से चेन्नई में होने वाले खिताबी मुकाबले में उसका सामना पूर्व क्षेत्र से होगा।
टेस्ट क्रिकेट मेरे खून में रचा बसा है: टी20 के उपकप्तान तिलक वर्मा
प्रत्येक युवा खिलाड़ी की तरह भारत की टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा का सपना भी टेस्ट क्रिकेट में खेलना है और उनका मानना है कि खेल का सबसे लंबा प्रारूप उनके खून में रचा बसा है। तिलक ने दक्षिण क्षेत्र की तरफ से उत्तर क्षेत्र के खिलाफ दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में 116 और नाबाद 51 रन बनाकर लाल गेंद की क्रिकेट (लंबी अवधि का प्रारूप) में फिर से अपनी काबिलियत साबित की। उनके इस शानदार प्रदर्शन से दक्षिण क्षेत्र फाइनल में जगह बनाने में सफल रहा।
तिलक ने अपनी टीम की जीत के बाद कहा, ‘‘मुझे शुरू से ही लाल गेंद से क्रिकेट खेलना पसंद रहा है। मैंने कभी भारत के लिए सीमित ओवरों की क्रिकेट खेलने का सपना नहीं देखा था, लेकिन ईश्वर की यही इच्छा थी। मैंने भारत के लिए टी20 और वनडे में पदार्पण किया है, लेकिन लाल गेंद की क्रिकेट मेरा मजबूत पक्ष रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कड़ी मेहनत की है। शायद जब मैं 10 साल का था तब से मैं कड़ी मेहनत कर रहा हूं और अब मैं 23 साल का हूं। मुझे आईपीएल की वजह से सफेद गेंद वाले प्रारूप में चुना गया। लेकिन उससे पहले मैंने लाल गेंद की क्रिकेट में काफी अनुभव हासिल कर लिया था।’’
तिलक ने कहा, ‘‘लंबी अवधि का प्रारूप मेरा मजबूत पक्ष रहा है और मुझे टेस्ट क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है। यह कुछ ऐसा है जो हमेशा से मेरे खून में रहा है।’’






