ताज़ा खबरें
एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर सियासत और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार (2 जनवरी) को युवा कांग्रेस ने नगर निगम मुख्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने एहतियातन 21 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक हिरासत में लिए गए लोगों में 3 महिलाएं भी शामिल हैं।

प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शहर के भागीरथपुरा इलाके में फैली दूषित पेयजल त्रासदी प्रशासन की घोर लापरवाही और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भ्रष्टाचार का नतीजा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता तो लोगों की जान नहीं जाती।

1 करोड़ मुआवजा और मंत्री के इस्तीफे की मांग

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस त्रासदी में जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

साथ ही कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव से तत्काल इस्तीफा लिया जाए। उनका यह भी कहना था कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।

घंटी बजाकर जताया विरोध

युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने साथ एक घंटी लेकर पहुंचे थे। घंटी बजाकर उन्होंने दूषित पेयजल त्रासदी के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। चश्मदीदों के मुताबिक, इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने प्रदर्शनकारियों से घंटी छीन ली और उसे पास के एमजी रोड थाने ले गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर घंटी जब्त करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस उपायुक्त राजेश व्यास ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं का रवैया उग्र हो गया था। एहतियात के तौर पर 21 लोगों को हिरासत में लिया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कैलाश विजयवर्गीय ने एक टीवी पत्रकार के सवाल पर कैमरे के सामने ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसे लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। भागीरथपुरा इलाका विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।

मौतों के आंकड़ों पर भ्रम

महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि दूषित पेयजल से फैले डायरिया के कारण 10 मरीजों की मौत हुई है। वहीं राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में पेश रिपोर्ट में अब तक चार बुजुर्गों की मौत की बात कही है। दूसरी ओर स्थानीय नागरिक छह महीने के बच्चे समेत 15 मौतों का दावा कर रहे हैं, जिसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख