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भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं. इसकी कई तस्वीरें सामने आती रही हैं, लेकिन ब्यावरा से आई एक तस्वीर बताती है कि सरकार इन बुनियादी सुविधाओं को लेकर कितनी ग़ैर ज़िम्मेदार है। ब्यावरा के सिविल अस्पताल में पूजा बाई को बिस्तर अस्पताल के बाहर मिला, जिसमें ना तकिया था, ना गद्दा और ना चादर, ड्रिप पेड़ से लटकी हुई। अस्पताल का कहना है उसके पास 30 बेड हैं, लेकिन मौसमी बीमारियों से अस्पताल भरा पड़ा है, 80 रोगी भर्ती हैं. ऊपर से नर्स और डॉक्टर बेहद कम, प्रभारी डॉक्टर का कहना है कि संबंधित नर्स को नोटिस भेजकर सफाई मांगी जाएगी। डॉ. एस एस गुप्ता ने कहा, 'खुले आसमान में ड्रिप लगाना गलत है, संबंधित से हम पूछेंगे ऐसी स्थिति क्यों निर्मित हुई। सरकार का कहना है कि मामले की जांच होगी, लेकिन विपक्ष उसे घेरने को तैयार बैठा है। मंत्री पारस जैन ने कहा मामला प्रभारी मंत्री और प्रशासन को देखना चाहिये, लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिये, अस्पताल को करना नहीं चाहिये था।

सतना: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल धीरे-धीरे प्रयोग की पाठशाला बनते जा रहे हैं। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह ने पहले स्कूलों को ज्यादा पैसा देने वाली कंपनियों के नाम करने का ऐलान किया था, तो अब कहा है कि छात्र उपस्थिति (हाजिरी) के समय 'यस सर' नहीं 'जय हिंद सर' बोलेंगे। इसकी शुरुआत 1 अक्टूबर से प्रायोगिक तौर पर सतना जिले से होगी। स्कूल शिक्षा मंत्री शाह मंगलवार को सतना जिले के चित्रकूट में थे। यहां विधानसभा का उप-चुनाव होने वाला है। लिहाजा मंत्रियों की सक्रियता बढ़ी हुई है। इसी क्रम में शाह ने स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति का जज्बा बढ़े, इसके लिए सभी शासकीय स्कूलों में प्रारंभ में ही प्रतिदिन ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान गाने के निर्देश दिए गए हैं। सतना जिले से ही प्रायोगिक तौर पर बच्चों की उपस्थिति के समय 'यस सर' बोलने के स्थान पर 'जय हिंद सर' बोलने की व्यवस्था 1 अक्टूबर से लागू किए जाने का निर्णय लिया जा रहा है। इसके बाद इसे पूरे प्रदेश मे लागू किया जाएगा। पिछले दिनों स्कूल शिक्षा मंत्री शाह ने सरकारी स्कूलों के नाम कंपनियों के नाम पर करने का सागर में आयोजित एक समारोह में ऐलान किया था।

भोपाल: सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिए जाने के मद्देनजर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फैसला किया है कि अब निकाह के समय ही काजियों और धर्मगुरूओं के माध्यम से वर और वधू पक्ष के बीच यह सहमति बन जाएगी कि रिश्ते को खत्म करने के लिए किसी भी सूरत में तलाक-ए-बिद्दत का सहारा नहीं लिया जाएगा। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बोर्ड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सोमवार को हुई बैठक में इस मसले पर सहमति बनी। इसमें बोर्ड ने साफ किया कि वह न्यायालय के फैसले का सम्मान करता है और तीन तलाक के खिलाफ और शरीयत को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए अभियान शुरू करेगा। दरअसल 22 अगस्त को देश की शीर्ष अदालत ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। बोर्ड ने इस संदर्भ में एक समिति के गठन का भी फैसला किया है। पर्सनल लॉ बोर्ड की इस बैठक में कुछ और भी फैसले किए गए जिसमें शादी के समय ही एक बार में तीन तलाक को ना कहने की बात प्रमुख है। बोर्ड के एक शीर्ष पदाधिकारी ने मीडिया को बताया, बेहतर होगा कि निकाह के समय ही लड़का और लड़की के परिवारों में यह सहमति बन जाए कि अगर रिश्ते खत्म करने की कोई स्थिति पैदा होती है, तो इसके लिए तलाक-ए-बिद्दत का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

भोपाल: भोपाल में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग हुई। इसमें एक बार में तीन तलाक़ को ग़ैरक़ानूनी करार दिए जाने और बाबरी केस को लेकर बात हुई। बैठक के बाद पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ़ किया कि तीन तलाक़ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करता है, लेकिन सरकार पर्सनल लॉ के मामले में दखलंदाज़ी बंद करे। वहीं बाबरी केस पर लॉ बोर्ड के सदस्यों का कहना है कि इस मामले में एक खास तरह की ज़ल्दबाज़ी दिखाने की कोशिश हो रही है, इस मामले में आराम से सुनवाई होनी चाहिए ताकि देर भले हो जाए नाइंसाफ़ी न हो। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक नौ घंटे से ज्यादा समय तक चली। वहीं सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के फैसले पर विमर्श और बड़े स्तर पर सामाजिक सुधार लाने के सुझाव देने के लिए 10 सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया। राजधानी के खानू गांव स्थित इंदिरा प्रियदर्शनी महाविद्यालय के सभागार में दोपहर 12 बजे शुरू हुई बैठक रात 9 बजे तक चली। ​बैठक के बाद बोर्ड की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं. समाज में जागृति लाने के लिए बोर्ड द्वारा अभियान चलाया जाएगा।

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