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सेनापति/इंफाल: मणिपुर के सेनापति जिले के एक इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा तलाशी अभियान चलाए जाने के कुछ घंटों बाद भीड़ ने पथराव किया, असम राइफल्स के शिविर में तोड़-फोड़ की और सुरक्षाकर्मियों की तीन गाड़ियों में आग लगा दी। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे

अधिकारियों ने बताया कि हिंसा की यह घटना जिला मुख्यालय में स्थित अर्द्धसैनिक बल के शिविर में मंगलवार रात साढ़े नौ बजे हुई जब भीड़ ने बैरक पर हमला किया।

एक अधिकारी ने बताया कि हालात अब काबू में हैं। सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और मध्यरात्रि तक भीड़ को तितर-बितर कर दिया था।

सेनापति जिले में अब स्थिति शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है

उन्होंने कहा कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और सेनापति जिले में स्थिति ‘‘अब शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है’’।

इंफाल: मणिपुर के लीलोन वैफेई गांव से 13 मई 2026 को कथित रूप से अगवा किए गए नागा समुदाय के छह लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। सभी शवों को इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (जेएनआईएमएस) के शवगृह में रखा गया है। करीब 28 दिनों बाद शवों के मिलने से क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजन और समुदाय के सदस्य शवों की पहचान सुनिश्चित करने के साथ-साथ मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

लियांगमाई नागा काउंसिल मणिपुर के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामाई ने कहा कि सबसे पहले यह पुष्टि की जाएगी कि बरामद शव वास्तव में उन्हीं छह लोगों के हैं जो पिछले महीने लापता हुए थे। उन्होंने कहा कि शवों की स्थिति का आकलन करने और पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ित परिवारों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

सरकारी कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए विजुनामाई ने कहा कि शवों को इंफाल लाने में 28 दिन का समय लगना बेहद निराशाजनक है।

इंफाल: कांग्रेस की मणिपुर इकाई ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राज्य में बार-बार हो रही हिंसा संवेदनशील मुद्दों से निपटने में राज्य और केंद्र सरकार की विफलता का परिणाम है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र और मणिपुर सरकार अपनी संवैधानिक शक्तियों का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं इसलिए राज्य में बार-बार हिंसा हो रही है।

राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त: कांग्रेस

कांग्रेस की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले कांगपोकपी जिले में संदिग्ध उग्रवादियों ने चर्च के तीन पदाधिकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ओ. इबोबी सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हम इन हत्याओं की कड़ी निंदा करते हैं। बुधवार सुबह एक समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी गई, जबकि शाम को दूसरे समुदाय के एक नागरिक की जान ले ली गई, जो पहली घटना के प्रतिशोध जैसा प्रतीत होता है।”

इंफाल: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बुधवार को बड़ा उग्रवादी हमला हुआ, जिसमें कुकी समुदाय के तीन चर्च नेताओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, अज्ञात हथियारबंद उग्रवादियों ने जिले के पहाड़ी इलाके में स्थित टाइगर रोड पर दो वाहनों पर घात लगाकर हमला किया। हमले में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

इंफाल के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दोनों वाहनों में सवार लोग कांगपोकपी-चुराचांदपुर (लमका) मार्ग से लौट रहे थे, तभी उग्रवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। मृतकों की पहचान वुमथांग, पादरी पाओगौलेन और पादरी कैगौलुन के रूप में हुई है। कई अन्य लोग इस हमले में घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (केएसओ) ने दावा किया कि सभी मृतक कुकी समुदाय के बैपटिस्ट चर्च से जुड़े नेता थे। संगठन ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि नागा उग्रवादी समूह ने इन वाहनों को निशाना बनाया। केएसओ के मुताबिक, चर्च नेता लमका में आयोजित यूबीसी कन्वेंशन में शामिल होकर वापस लौट रहे थे।

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