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नई दिल्ली: एनसीपीआई में विलय करने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया। तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर यह नोटिस जारी किया गया है। याचिका में लोकसभा स्पीकर को भी पक्ष बनाया गया है। उनकी तरफ से कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि स्पीकर ने पहले ही मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने सभी सांसदों से जवाब मांगा है।

मेहता ने कहा कि स्पीकर को कोर्ट की तरफ से औपचारिक नोटिस जारी न किया जाए। वह उनकी तरफ से कोर्ट की सहायता करेंगे। जजों ने इसे स्वीकार कर लिया।

अभिषेक ने की ये मांग

अभिषेक बनर्जी की याचिका में कहा गया है कि इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए और उनकी संसद सदस्यता रद्द होनी चाहिए। लेकिन लोकसभा स्पीकर ऐसा नहीं कर रहे हैं।

अभिषेक ने कहा है कि इन सांसदों को न तो आधिकारिक रूप से एक अलग गुट के रूप में मान्यता दी गई है और न ही वैसा व्यवहार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, अगर उन्हें एनसीपीआई के रूप में मान्यता देनी है तो वह फैसला जल्द होना चाहिए, लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि एक तरफ तो उन्हें अलग पहचान नहीं दी जा रही और दूसरी तरफ जब वे सदन में बोलते हैं तो उनका समय हमारे (टीएमसी के) तय समय से काटा जाता है।

स्पीकर को भी दिया पत्र

अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर ओम बिरला से मिलकर भी पार्टी के 20 सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इन बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की याचिका पर जल्द से जल्द फैसला लेने की अपील की थी। टीएमसी ने इन 20 बागी सांसदों के खिलाफ जून महीने में ही संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन दो महीने बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

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