नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास का गुरुवार को अहमदाबाद में निधन हो गया। वह पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थीं। व्यास गणगौर पूजा के दौरान चुन्नी में आग लगने से वे गंभीर रूप से झुलस गई थीं। करीब 90 प्रतिशत तक जलने के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। उन्हें इलाज के लिए गुजरात के अहमदाबाद लाया गया था। यहां पर उनका इलाज चला रहा था। व्यास ने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर उदयपुर के लिए रवाना किया गया है।
पूर्व सीएम गहलोत ने जताया दुख
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने शोक संदेश में लिखा है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ गिरिजा व्यास का निधन हम सबके लिए एक अपूरणीय क्षति है। डॉ गिरिजा व्यास ने शिक्षा, राजनीति एवं समाज सेवा के क्षेत्र में बड़ा योगदान था। उनका इस तरह एक हादसे का शिकार होकर असमय जाना हम सभी के लिए एक बड़ा आघात है। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना करता हूं।
गहलाेत के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी दुख व्यक्त किया है। शर्मा ने लिखा है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को सद्गति तथा शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
79 साल की आयु में छोड़ी दुनिया
कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरिजा व्यास का जन्म 8 जुलाई 1946 को कृष्ण शर्मा और जमुना देवी व्यास के घर हुआ था। उन्होंने 79 साल की आयु में दुखद हादसे के बाद दुनिया को अलविदा कहा। उन्होंने दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और डेलावेयर विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। गिरिजा व्यास की गिनती कांग्रेस को काफी सौम्य और सरल नेताओं में होती है। उन्होंने अपने जीवन में आठ किताबें लिखी। गणगौर पूजा के दौरान आग से झुलसने पर उदयपुर में शुरुआती इलाज के बाद अहमदाबाद ले जाया गया था।
राजनीति में खेली लंबी पारी
गिरिजा व्यास 1985 में वे राजस्थान विधानसभा से विधायक बनीं। इसके बाद वह 1990 तक पर्यटन मंत्री रहीं। 1991, 1996 और 1999 में उदयपुर से लोकसभा सांसद चुनी गईं। वह नरसिम्हा राव सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री बनी। इसके बाद मनमोहन सिंह की यूपीए-2 सरकार में शहरी आवास एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री का दायित्व संभाला। इसके अलावा वह 2001-04 तक राजस्थान कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं। इतना ही नहीं उन्होंने 2005-11 तक राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन के तौर पर भी काम किया।






