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नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक पीजी हादसे की जांच में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। बुधवार को पुलिस ने पीजी संचालक सुधांशु को गिरफ्तार किया। उसका पार्टनर शुभम त्यागी अभी फरार है।

पुलिस के मुताबिक, दोनों ने अगस्त 2025 में हादसे वाली बिल्डिंग को लीज पर लिया था और इसके बाद वहां पीजी का संचालन शुरू किया था। इससे पहले पुलिस ने मंगलवार को लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया था। वहीं, बिल्डिंग मालिक हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को भी पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

महेश ने पुलिस को क्या बताया?

पुलिस रिमांड के दौरान महेश ने जांच अधिकारियों को बताया कि बिल्डिंग को पीजी संचालित करने वाली कंपनी को लीज पर दिया गया था। उसके मुताबिक, पीजी संचालकों की शिकायत के बाद बेसमेंट में जमा पानी और सीलन की समस्या को दूर करने के लिए मरम्मत का काम कराया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार, बेसमेंट से पानी निकालने के बाद वहां निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान पावर ट्रॉवेल मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि मशीन से पैदा हुई कंपन और पहले से कमजोर संरचना के चलते बिल्डिंग की स्थिति बिगड़ी और वह अचानक भरभराकर गिर गई।

हादसे में 7 लोगों की मौत

6 सितंबर को सत्य निकेतन में पीजी की बिल्डिंग गिरने से बड़ा हादसा हुआ था। इस दुर्घटना में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि 5 लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने आसपास की इमारतों का भी निरीक्षण शुरू किया। निगम ने एक ऐसी इमारत को खतरनाक घोषित किया, जिसे मंगलवार को गिरा दिया गया। इस इमारत में गर्ल्स PG संचालित हो रहा था। हादसे के बाद इसे खाली करा दिया गया था।

पीजी मालिक के परिवार पर भी कार्रवाई

मामले में गिरफ्तार किए गए बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को सोमवार रात पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। पूछताछ के दौरान महेश से बिल्डिंग की मरम्मत और PG संचालन से जुड़े पहलुओं पर जानकारी ली गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हादसे से पहले बिल्डिंग में किस तरह के निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा था और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सत्य निकेतन हादसा

सत्य निकेतन पीजी हादसे की गूंज अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। मंगलवार को मामले का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में हुआ। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुद्दुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने संकेत दिया कि अदालत इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि देशभर में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति की भी समीक्षा कर सकती है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने अदालत के सामने 6 सितंबर को हुए सत्य निकेतन हादसे का जिक्र किया। वह देशभर में अवैध और असुरक्षित इमारतों से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत की सहायता कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी अवैध और असुरक्षित इमारतों को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। अब अदालत इन निर्देशों के पालन और देशभर में भवन सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा कर सकती है। सत्य निकेतन हादसे के बाद यह मामला दिल्ली से निकलकर देशभर में इमारतों की सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही के बड़े सवाल से जुड़ गया है।

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