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जयपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे 86 वर्षीय संत आसाराम को राहत देने से इंकार करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि न्यायालय ने उन्हे सामृहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया। लेकिन अन्य गंभीर आरोपो में दोषसिद्धि और सजा यथावत रखी गई है। उच्च न्यायालय ने आसाराम को सरेंडर करने का आदेश भी दिया है। आसाराम इनदिनों अंतरिम जमानत पर हैं।

उम्रकैद की सजा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं

राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर स्थित मुख्यपीठ में न्यायाधीश अरूण मोंगा और न्यायाधीश योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने बुधवार को आसाराम सहित तीन आरोपितों की ओर से दायर अपीलों पर फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में नीचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।

जयपुर: कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले के विरोध में बीजेपी मुख्यालय तक रैली निकाली। कांग्रेस मुख्यालय से शुरू हुई यह रैली शहीद स्मारक होते हुए बीजेपी कार्यालय की ओर बढ़ी। कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे। पुलिस ने शहीद स्मारक के पास भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी और बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया।

एनटीए भंग करने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

रैली से पहले कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए डोटासरा ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में बार-बार हो रही अनियमितताओं ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर से जनता का भरोसा खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, “एनटीए को भंग किया जाना चाहिए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।”

जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि उसके खुद के ही विधायक सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं।

गहलोत ने आंगनबाड़ी के पोषाहार की खराब गुणवत्ता को लेकर बीजेपी के एक विधायक की कतिपय टिप्पणी के हवाले से यह बात कही।

उन्होंने कहा, ‘‘राजस्थान की बीजेपी सरकार में क्या चल रहा है? खुद सत्ताधारी दल के विधायक ही आज सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं।’’

अशोक गहलोत का राजस्थान सरकार से सवाल

गहलोत के अनुसार, ‘‘उदयपुर की समीक्षा बैठक में गोगुंदा से बीजेपी विधायक प्रताप गमेती का यह कथन बेहद विचलित करने वाला है कि ‘आंगनबाड़ी के पोषाहार को जानवर भी नहीं खाते।’ विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ ऐसा खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।’’

जयपुर: आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत मिली है। यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को अदालत ने मेडिकल आधार पर दी गई उनकी अंतरिम जमानत को 25 मई 2026 तक या उनकी अपील पर अंतिम फैसला आने तक, जो भी पहले हो, बढ़ाने का आदेश दिया है।

स्वास्थ्य और उम्र का हवाला, इलाज जारी रखने की दलील

आसाराम की ओर से दायर याचिका में उनकी बढ़ती उम्र, गंभीर बीमारियों और करीब 12 साल जेल में बिताने का हवाला दिया गया। उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि वे 29 अक्टूबर 2025 से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और इलाज करा रहे हैं। दलील दी गई कि अगर जमानत अवधि नहीं बढ़ाई गई तो उनका इलाज अधूरा रह जाएगा और उन्हें वापस जेल में सरेंडर करना पड़ेगा।

मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की डिवीजन बेंच में हुई।

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