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नई दिल्ली: विपक्षी इंडिया गठबंधन के घटक दलों के सांसदों ने मंगलवार को संसद मार्ग से निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक लोकतंत्र बचाव मार्च निकाला, हालांकि पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में ले लिया।

आकाशवाणी भवन में धरने पर राहुल-प्रियंका

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचने की कोशिश में आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर गए और एक पेड़ के नीचे बैठ गए। कांग्रेस नेताओं और अन्य सांसदों को इससे पहले संसद मार्ग पर नीति आयोग भवन के निकट सुरक्षा कर्मियों ने निर्वाचन आयोग की ओर बढ़ने से रोक दिया था।

विपक्षी दलों की मांग है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाया जाए और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द किया जाए। निर्वाचन सदन की तरफ बढ़ रहे सांसदों को जब पुलिस ने रोका तो वे संसद मार्ग पर ही धरने पर बैठ गए।

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी को लेकर सोमवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में ‘पैटर्न’’ बन गया है कि जो महिला सवाल पूछे, उसे चुप करा दो।

राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला

राहुल गांधी ने दो महिला पत्रकारों नफीसा खान और शाहीन खान के साथ बातचीत का वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया और सवाल किया कि गृह मंत्री अमित शाह की पुलिस महिलाओं से क्यों डरती है? पत्रकार शाहीन और नफ़ीसा ने सितंबर में आरोप लगाया था कि उन्हें एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ और ‘भ्रामक’ बताया था।

राहुल गांधी ने इन पत्रकारों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘दिल्ली में इस वक़्त जो हो रहा है, उसका एक ही पैटर्न है, जो औरत सवाल पूछे, उसे चुप कराओ।’’

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित प्रारूप को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियोजन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि हमने ऐसे किसी भी फॉर्म को अप्रूव नहीं किया है। यह स्पष्ट कर दें। जब रिकॉर्ड हमारे सामने आएगा तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया।

मुख्य न्यायाधीश की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दावा किया गया था कि कुछ राज्यों में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ लगाए गए नए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त है। नए फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पहले से विवाद का विषय हैं। सामने आया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने इन बदलावों पर आपत्ति जताई थी। ⁠उनका कहना था कि निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 में केंद्र सरकार द्वारा संशोधन किए बिना ये बदलाव नहीं किए जा सकते।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल आदेश देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हम न्यूज रिपोर्ट के आधार पर आदेश जारी नहीं कर सकते हैं।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका में एसआईटी जांच की मांग और एसआईआर को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारत सरकार, तीनों चुनाव आयुक्त, कैबिनेट सेक्रेटरी, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (डीईसी) मनीष गर्ग, आईटी हेड सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया है।

'चुनाव आयुक्तों जितना संरक्षण पीएम को भी नहीं'

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह के वकील विकास सिंह ने कोर्ट में कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और उनके अधिकारों को लेकर कानून में अब बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा, 'सीईसी और चुनाव आयुक्तों पर उनके कार्यकाल में किए गए कामों के लिए कोई केस नहीं हो सकता। उन्हें अपने कामकाज की प्रक्रिया निर्धारित करने की भी शक्ति दी गई है।'

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