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बीजिंग: चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कैंपेन की आलोचना की है जिसके तहत वो ईरान और उसके साझेदारों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। बीजिंग के मुताबिक ऐसी पाबंदियां स्थिति को और उलझा सकती हैं। "इकोनॉमिक डी-डे" कैंपेन की आलोचना करते हुए कहा कि और ज्यादा प्रतिबंध लगाने से लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद नहीं मिलेगी।

बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों से कहा, "प्रतिबंध लगाने और दबाव डालने से समस्या का समाधान नहीं होता है।" इसमें आगे कहा गया, "चीन संबंधित पक्षों से जिम्मेदार कदम उठाने और कूटनीतिक व राजनीतिक तरीकों से मुद्दों को सुलझाने का आग्रह करता है।"

दरअसल, इन कदमों से चीन पर खास तौर पर असर पड़ेगा, क्योंकि एनालिटिक्स फर्म केप्लर के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, वह ईरान से निर्यात होने वाले तेल का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खरीदता है। ऐसे में अगर अमेरिका ने ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों, बैंकों या शिपिंग नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध लगाए, तो इसका सीधा असर अमेरिका-चीन संबंधों पर पड़ सकता है।

बुखारेस्ट: रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन ने गुरुवार को 'नेपच्यून डीप' प्लेटफॉर्म के पास ड्रोन कार्रवाई पर रूस की कड़ी आलोचना की। साथ ही स्‍पष्‍ट क‍िया क‍ि हम हर चुनौत‍ी का सामना करने में सक्षम हैं। हम नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर सतर्क हैं।

निकुसोर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में रोमानियाई सशस्त्र बलों और दो रोमानियाई एफ-16 लड़ाकू विमानों के पायलटों को काला सागर में 'नेपच्यून डीप' प्लेटफॉर्म के पास मौजूद समुद्री ड्रोन को नष्ट करने के सफल मिशन के लिए बधाई दी।

उन्‍होंने कहा, ''मैं कोस्ट गार्ड को भी बधाई देता हूं, जिन्होंने इलाके में ड्रोन की मौजूदगी की सूचना तुरंत दी। इस कार्रवाई में सबसे पहली प्राथमिकता प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे लोगों की जान की सुरक्षा करना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को किसी भी संभावित खतरे से बचाना था।''

ढाका: बांग्लादेश की संसद ने गुरुवार को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का नया राष्ट्रपति चुना। इसके साथ ही 1960 के दशक के अंत में एक वामपंथी छात्र कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में कदम रखने वाले मिर्जा ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया है। नए राष्ट्रपति 21 अगस्त को बंगभवन में पद की शपथ लेंगे।

मिर्जा फखरुल इस्लाम बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति

बीएनपी के लंबे समय से महासचिव रहे मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन समर्थित उम्मीदवार ओली अहमद को हराया। फखरुल को 255 वोट मिले, जबकि अहमद को 88 वोट प्राप्त हुए। गुरुवार दोपहर राष्ट्रीय संसद में हुए राष्ट्रपति चुनाव में कुल 343 वैध मत डाले गए। यह चुनाव मुख्य चुनाव आयुक्त और रिटर्निंग अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन की निगरानी में आयोजित किया गया।

वॉशिंगटन: अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर सलाह देने वाली संस्था अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) के कुछ अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर बड़ा बयान दिया है। आयोग के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से स्वयंसेवक को राजनयिक सम्मान न देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने की अपील की है। साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की गई है।

मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले बयान

यूएससीआईआरएफ के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने आरएसएस को एक व्यापक संगठन बताते हुए आरोप लगाया कि उसके कुछ सहयोगी संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से ईसाइयों और मुसलमानों के खिलाफ हमलों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरएसएस से जुड़े होने का भी उल्लेख किया।

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