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नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का 'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण' (एसएसआर) किया जाएगा। इनमें वैसे राज्य भी शामिल हैं, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा सहित इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे एक पत्र में आयोग ने बताया कि एक जनवरी 2027 ‘‘पात्रता तिथि’’ मानी जाएगी।

इस एसएसआर का उद्देश्य पात्र मतदाताओं, खासकर युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों को मतदाता सूची में शामिल करना, इसकी प्रविष्टियों में सुधार करना और इसमें संशोधन को और बेहतर बनाना है।

जहां 403-सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है, वहीं 60-सदस्यीय मणिपुर, 40-सदस्यीय गोवा, 117-सदस्यीय पंजाब और 70-सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर 2026 को शाम 5:00 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का एलान किया है। कनॉट प्लेस के एक स्थानीय वेंडर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस पर रोक लगाने की मांग थी। कोर्ट ने दीपके के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।

इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि उन्होंने इस प्रदर्शन को नियंत्रित करने और कानून के मुताबिक सभी ज़रूरी व कड़े कदम उठाने के पर्याप्त इंतजाम कर लिए हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रदर्शन पर रोक लगाने से मना कर दिया। इस पर अभिजीत दीपके ने कहा, 'दिल्ली पुलिस को तिरंगा लहराने से क्या दिक्कत है?' यह याचिका दिल्ली निवासी अनिल कुमार गुप्ता ने रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों के पक्ष में दायर की थी, जिनका कारोबार जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में आए दिन होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से बुरी तरह प्रभावित होता है।

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना रद्द करने, सीजेपी के प्रदर्शन जैसे मामलों पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांगा। वहीं, विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर भी निर्देश दिए गए।

एसआईआर पर चुनाव आयोग को नोटिस

राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और इसमें कथित अनियमितताओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप भी उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस द्वारा कथित तौर पर पिटाई किए जाने को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि दोनों नेता ‘‘भारत की आवाज’’ के खिलाफ खड़े हैं।

प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस ने किया अत्याचार: राहुल

राहुल गांधी कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ मीडिया से मुखातिब हुए, जिन्हें दिल्ली में मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने के कारण चोट आई है।

गांधी ने इन छात्रों की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘जैसा कि मैंने अपनी प्रेस वार्ता में कहा था, अपने चारों ओर देखिए। यह भारत है। अमित शाह जी, इसे ध्यान से देखिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यहां कोई हिंदू, कोई मुसलमान, कोई जाति, कोई महिला या कुछ और नहीं है। यहां सिर्फ एक आवाज, एक विरोध है और वह भारत की आवाज है।’’

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