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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई बार आमना-सामना होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि सीमा पर ऐसी स्थिति अभी भी बनी हुई है। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने क्या कहा?

एक कार्यक्रम के दौरान आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई बार ऐसी परिस्थितियां बनीं, जब दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आए। उन्होंने सीमा पर तैनात शौर्य कमांडो टीमों के काम की सराहना भी की। कपूर के मुताबिक, आईटीबीपी पहले माउंटेन गुरिल्ला फोर्स के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन बाद में उसने चीन सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली पारंपरिक फोर्स के रूप में अपनी भूमिका विकसित की। अब संगठन का लक्ष्य पर्वतीय क्षेत्रों में एक सक्षम बल के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है।

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। नेहा ने यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 130 के तहत शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने के लिए जारी किए गए नोटिस को चुनौती देते हुए दायर की है। नेहा ने दलील दी कि नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

छात्र नेता ने कहा- तिरंगा फहराने के लिए इजाजत की जरूरत नहीं

आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने पुलिस के उस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें ‘‘शांति बनाये रखने’’ के लिए एक विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष बॉण्ड भरने को कहा गया था। दिल्ली पुलिस के उस नोटिस का जिक्र करते हुए, जिसमें कहा गया था कि बोरा ने बिना वैध अनुमति के राष्ट्रीय ध्वज फहराया, उनके वकील ने दलील दी कि नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि वह इस याचिका पर शुक्रवार को अपना आदेश सुनाएंगे।

नई दिल्ली: संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और ‘पीपुल अगेंस्ट एसआईआर’ मंच ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। दोनों संगठनों ने मतदाता सूचियों से हटाए गए लोगों के मतदान के अधिकार को बहाल करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा उनके खिलाफ अभियोजन की मांग की है।

चुनाव आयोग दफ्तर तक मार्च

आयोजकों के अनुसार, विरोध-प्रदर्शन जिला और तहसील मुख्यालयों, राज्य की राजधानियों और दिल्ली में किए जाएंगे। दिल्ली में ‘पीपुल अगेंस्ट एसआईआर’ ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने का आह्वान किया है। केंद्र के अब निरस्त किए जा चुके तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 2020-21 के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले एसकेएम ने कहा कि उसके घटक संगठन जिलाधिकारियों और उपमंडल मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपेंगे।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की मांग के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि अगर ऐसा प्रस्ताव आता है तो उस पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रक्रिया वैसी ही है जैसी सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है।

गौरतलब है कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले भी विपक्ष ने दोनों सदनों में ऐसा नोटिस दिया था। यह नोटिस 12 मार्च को दिया गया था। इस पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। यह नोटिस खारिज कर दिया गया था. विपक्ष का आरोप था कि इसे खारिज करने का कोई कारण नहीं बताया गया।

आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जब ऐसा प्रस्ताव लाया जाएगा तो नियमों के अनुसार फैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में प्रक्रिया बिल्कुल स्पष्ट है। बिरला ने यह भी कहा कि परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों के लिए विशेष सत्र बुलाने का फैसला सरकार को करना है।

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