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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट के इस्तेमाल को हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार बताया है। कोर्ट ने कहा है कि यह अधिकार बच्चों को भी हासिल है। उन्हें इससे पूरी तरह वंचित करना गलत होगा। बेंच ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं। बच्चों को दोनों का अधिकार है।

सोशल मीडिया और दूसरी ऑनलाइन सेवाओं पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर चिंता जताने वाली एक याचिका पर आदेश देते हुए कोर्ट ने यह बातें कहीं हैं। जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने इस तरह की सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने की व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है।

फैसले में जजों ने माना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(ए) के तहत इंटरनेट का इस्तेमाल भी एक मौलिक अधिकार है। बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना उनकी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं हो सकता। इंटरनेट पर बच्चों के लिए कई खतरे हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की नाकामी है। इसे लेकर कदम उठाए जाने चाहिए।

नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सत्ता परिवर्तन वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस पर बांग्लादेश के रास्ते सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनता खुद सत्ता परिवर्तन चाहती है। कपिल सिब्बल ने भ्रष्टाचार, संस्थाओं और मतदाता सूची को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।

कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आप आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस बांग्लादेश के रास्ते ‘सत्ता परिवर्तन’ चाहती है। नहीं! जनता ‘सत्ता परिवर्तन’ चाहती है। भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत के नारे के साथ हुए विरोध प्रदर्शनों ने आपको सत्ता तक पहुंचाया था। लेकिन उसके बाद आपने क्या किया? भ्रष्टाचार को गले लगा लिया। संस्थाओं पर कब्जा कर लिया। मतदाता सूची में हेरफेर किया। अब सत्ता से जाने का वक्त आ गया है!"

उनके इस बयान में सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और संस्थाओं के इस्तेमाल जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। साथ ही, उन्होंने सत्ता परिवर्तन को लेकर सरकार के आरोपों का जवाब देते हुए जनता की इच्छा का सवाल उठाया है।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस ने दीपके हिरासत में लिया था और अब उनके खिलाफ कार्रवाई भी शुरू हो गई है। दीपके को सीजेपी के 'लहरा दो तिरंगा' अभियान के दौरान शुक्रवार को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने दीपके के खिलाफ किन धाराओं में कार्रवाई शुरू की है और उसका अगला कदम क्या होगा, इसको लेकर पूरी जानकारी सामने आ गई है।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने बताया, अभिजीत दीपके के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 126/170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। यह धारा मुख्य रूप से शांति भंग या टकराव की स्थिति को देखते हुए लगाई जाती है। दिल्ली पुलिस अब दीपको को शनिवार (17 अक्टूबर) को एसईएम कोर्ट के सामने पेश करेगी। अहम बात यह भी है कि दीपके को पिछली बार भी कोर्ट ने एक साल तक शांति भंग न करने की शर्त पर रिहा किया था।

वहीं, आइसा प्रेसिडेंट नेहा बोरा को शुक्रवार शाम हिरासत में लिए जाने के बाद तड़के सुबह छोड़ दिया गया है।

नई दिल्ली: सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। वह कनॉट प्लेस जाने की कोशिश कर रहे थे। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 'लहरा दो तिरंगा' मार्च का एलान किया है।

सीजेपी ने इसे अपने नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में बुलाया है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के इस मार्च को अनुमति नहीं दी है। कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू हैं। पुलिस ने लोगों से इलाके में जाने से बचने की अपील की है।

दिल्ली में कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन से पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी कर सेंट्रल पार्क नहीं आने को कहा था, क्योंकि वहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू है।

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