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नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने और भू-रा
जनीतिक अनिश्चितता बढ़ने के बीच रुपया मंगलवार को 62 पैसे टूटकर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 96.30 (अस्थायी) पर रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि नए सिरे से बढ़े भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और निवेशकों के सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करने से अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ी जिससे रुपये पर दबाव बना।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.95 प्रति डॉलर पर खुला और 96.30 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 62 पैसे की गिरावट है।
रुपया सोमवार को 30 पैसे की गिरावट के साथ 95.68 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 101.07 पर रहा।
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मुंबई: कच्चे तेल के दाम में तेजी के बीच स्थानीय शेयर बाजार में मंगलवार को गिरावट आई और दोनों मानक सूचकांक नुकसान में रहे। बीएसई सेंसेक्स 561 अंक टूट गया जबकि एनएसई निफ्टी में 159 अंक की गिरावट आई।
विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ने से कच्चे तेल के दाम में तेजी आई है और निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। साथ ही विदेशी पूंजी की निकासी और डॉलर के मुकाबले रुपये के 96 के स्तर से नीचे आने का भी बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा।
तीन कारोबारी सत्रों की बढ़त के बाद, बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत टूटकर 77,054.94 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, यह 614.92 अंक यानी 0.79 प्रतिशत टूटकर 77,001.48 अंक पर आ गया था।
इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी 158.95 अंक यानि 0.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,052.05 अंक पर बंद हुआ।
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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार जनवरी-जून 2026 की अवधि में 23.6 प्रतिशत बढ़कर 91.72 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान दोनों देशों का निर्यात बढ़ा, लेकिन भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 67.1 अरब डॉलर हो गया। चीन के सीमा-शुल्क विभाग ने मंगलवार को जारी व्यापार आंकड़ों में यह जानकारी दी।
आंकड़ों के मुताबिक, चीन का भारत को निर्यात वर्ष 2026 की पहली छमाही में 21.8 प्रतिशत बढ़कर 79.41 अरब डॉलर हो गया, जबकि भारत का चीन को निर्यात 37.2 प्रतिशत बढ़कर 12.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस तरह भारत को जनवरी-जून के दौरान 67.1 अरब डॉलर का व्यापार घाटा उठाना पड़ा।
चीन से भारत को होने वाले प्रमुख निर्यात में विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दूरसंचार उपकरण, स्मार्टफोन और पीसीबी के पुर्जे, सेमीकंडक्टर, लिथियम-आयन बैटरियां, चार्जर, सर्वर, केबल, औद्योगिक मशीनरी, कंप्यूटर, कार्बनिक रसायन, प्लास्टिक और पॉलिमर शामिल हैं।
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नई दिल्ली: खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी से जून में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई। मई में यह 9.68 प्रतिशत के स्तर पर थी। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) की गणना के लिए आधार वर्ष 2022-23 है। खाद्य वस्तुओं में मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 5.49 प्रतिशत हो गई जो मई में 3.60 प्रतिशत थी। गैर-खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई 11.07 प्रतिशत रही जबकि खनिज श्रेणी में यह 9.45 प्रतिशत दर्ज की गई।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि थोक मुद्रास्फीति के जून, 2026 के आंकड़े पर खनिज तेल (जिसमें पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं), खाद्य वस्तुएं, विनिर्मित मूल धातु तथा विनिर्मित रसायन एवं रासायनिक उत्पादों की कीमतों का असर दिखा। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन एवं बिजली श्रेणी में थोक मुद्रास्फीति जून में 27.41 प्रतिशत रही, जबकि मई में यह 30.33 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों की श्रेणी में थोक मुद्रास्फीति मई की तरह जून में भी 7.48 प्रतिशत पर स्थिर रही।
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