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अमरकंटक (मप्र): नर्मदा सेवा यात्रा के समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (सोमवार) कहा कि जिस मां नर्मदा ने हमें बचाया है उसे बचाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। आज देश में कई नदियां सिर्फ नक्शे में बची हैं इसलिए जरूरी है कि नदी संरक्षण को पुण्य काम के तौर पर अपनाकर नर्मदा को बचाया जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने मां नर्मदा की नहीं, हमेशा अपनी परवाह की। जबकि कहते हैं, नर्मदा की परिक्रमा से अहंकार चूर-चूर हो जाता है। मां नर्मदा एक-एक पौधे के प्रताप से प्रकट होती है। और गुजरात तो नर्मदा के एक-एक बूंद की अहमियत जानता है। मध्यप्रदेश को स्वच्छता अभियान में मिली जबरदस्त सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि देश के 100 सबसे साफ शहरों में 22 शहर एमपी से हैं। ये काम जनभागीदारी और सरकार के बीच आपसी सामंजस्य से ही संभव है। एमपी के लोगों ने साफ-सफाई को अपना काम माना इसलिए इतनी बड़ी सफलता मिली। सफाई में सफलता सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं मिल सकती है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिवसीय प्रवास पर विशेष विमान से नई दिल्ली से दोपहर 12.25 बजे जबलपुर के डुमना विमानतल पहुंचे जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनकी अगवानी की. प्रधानमंत्री जबलपुर से हेलीकॉप्टर से रवाना होकर 1.35 बजे अनूपपुर जिले के अमरकंटक पहुंचे और दोपहर 2.00 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचे।

उज्जैन: स्वयंभू गो रक्षकों ने गाय के साथ मारपीट करने और उसकी पूंछ काटने के आरोप में एक युवक की बेल्ट एवं लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई कर दी। एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना उज्जैन के थाना जीवाजीगंज क्षेत्र में गुमानदेव मंदिर के पास पीपली नाके चौराहे पर शनिवार को हुई। पीड़ित के साथ हुई मारपीट का एक वीडियो भी वायरल हुआ है। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, जीवाजीगंज पुलिस थाना प्रभारी ओपी मिश्रा ने रविवार को बताया कि इन लोगों का आपस में पुराना पैसों के लेन-देन का मामला है। इसकी वजह से इन्होंने मौका पाकर उसे बुरी तरह से पीट दिया। यद्यपि इस घटना का कथित वीडियो देखने से स्पष्ट होता है कि वे इस युवक को गाय के नाम पर बेल्ट एवं लात-घूंसों से सरेआम पीट रहे हैं, लेकिन पुलिस का दावा है कि यह पैसे के लेन-देन का मामला है। थाना प्रभारी के अनुसार, जिस युवक की पिटाई की गई है वह उज्जैन स्थित निवासी तिलकेश्वर का निवासी है। उसका नाम अपुडा मालवीय है।

भोपाल: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में शुक्रवार को आग लगने से बड़ा हादसा हुआ। राशन की दुकान में आग लगने से 25 लोगों की मौत होने की खबर है। इस हादसे में अब तक 21 लोगों के मौत होने की पुष्टि हो गई है, जबकि आग में कई लोग झुलसे भी हैं। यह भीषण हादसा राशन की दुकान में केरोसिन बांटे जाने के दौरान हुआ. केरोसिन लेने के लिए करीब 100 लोग कतार में लगे थे। तभी कमरे में आग लग गई और देखते ही देखते इस आग ने पूरे कमरे को अपनी जद में ले लिया। आग लगने की वजह से लोग कमरे से बाहर नहीं निकल पाए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हर्रई तहसील में बारगी स्थित सरकारी समिति केंद्र पर शुक्रवार को राशन और केरोसिन वितरण किया जा रहा था। राशन लेने के लिए करीब सैकड़ों ग्रामीण कतार में भवन के सामने मौजूद थे, जबकि केंद्र के अंदर करीब तीन दर्जन लोग मौजूद थे। बताया जा रहा है कि केंद्र में वितरण के लिए रखे केरोसिन के भंडारण में अचानक आग लग गई। कुछ ही पल में आग ने पूरे केंद्र को अपनी चपेट में ले लिया। इस वजह से अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।

इंदौर: अवैध बूचड़खानों पर योगी सरकार के शिकंजे के बाद अब खबर आ रही है कि देश में बहुत ऐसे बूचड़खाने हैं जो पंजीकृत नहीं है। बूचड़खानों के खिलाफ देश भर में मुहिम जारी है। हाल ही में आरटीआई से पता चला है कि देश में केवल 1,707 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के 8 राज्यों में एक भी बूचड़खाने पंजीकृत नहीं है। तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा पंजीकृत बूचड़ाखाने हैं। जबकि, अरुणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ समेत आठ राज्यों में एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं है। मध्यप्रदेश के नीमच के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने उन्हें ये आंकड़े मुहैया कराए हैं। फूड लायसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिये ये जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा, देश में धड़ल्ले से अवैध बूचड़ाखने चल रहे हैं। एफएसएसएआई के एक अफसर ने बताया कि अरणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा व नगर हवेली, दमन व दीव, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में एक भी बूचड़खाना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत नहीं है। तमिलनाडु में 425, मध्यप्रदेश में 262 और महाराष्ट्र में 249 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं। यानी देश के कुल 55 फीसदी पंजीकृत बूचड़खाने इन्हीं तीन सूबों में चल रहे हैं।

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