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इंदौर: विशेष अदालत ने सिमी सरगना सफदर हुसैन नागौरी समेत इस प्रतिबंधित संगठन के 11 कार्यकर्ताओं को देशद्रोह के नौ साल पुराने मुकदमे में आज (सोमवार) उम्रकैद की सजा सुनायी। अहमदाबाद की साबरमती केंद्रीय जेल में बंद 10 मुजरिमों की गुहार पर उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये फैसला सुनाया गया। विशेष अपर सत्र न्यायाधीश बीके पालोदा ने सभी 11 सिमी कार्यकर्ताओं को भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए (देशद्रोह ),153-ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता फैलाना और सौहार्द्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले काम करना),विधिविरद्ध क्रियाकलाप अधिनियम और अन्य सम्बद्ध कानूनों के तहत दोषी करार दिया। मुजरिमों में सफदर हुसैन नागौरी , हाफिज हुसैन आमिल परवाज , शिवली , कमरूद्दीन , शाहदुली , कामरान , अंसार , अहमद बेग ,यासीन और मुनरोज शामिल हैं। सरकारी वकील विमल मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया कि मुनरोज को छोड़कर शेष 10 मुजरिम अहमदाबाद के साबरमती केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान उनकी गुहार के मुताबिक उन्हें फैसले के वक्त गुजरात की इस जेल से इंदौर नहीं लाया गया और उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत के सामने पेश कर फैसला सुना दिया गया। मिश्रा ने बताया कि मुनरोज मामले में लम्बे समय से जमानत पर बाहर चल रहा था। वह फैसले के वक्त इंदौर की अदालत के सामने पेश हुआ। मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद उसे अदालत से शहर की केंद्रीय जेल भेज दिया गया।

भोपाल: प्रसिद्ध योग गुरु बाबा रामदेव ने नये राजनीतिक दल के गठन के संभावनाओं से इंकार करते हुए कहा कि उनका अभी तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मोहभंग नहीं हुआ है, क्योंकि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में किये गये वादों को पूरा करने के लिये उनके पास दो वर्ष और बचे हैं। रामदेव ने कहा कि यदि राष्ट्रहित के किसी मामले पर कांग्रेस उनकी मदद चाहेगी तो वह उसके लिये तैयार होंगे। रामदेव ने आज (सोमवार) यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘विश्व में सब कुछ विश्वास पर टिका है। देश में कालेधन पर कार्रवाई की गयी है। अब विशेषकर विदेशी मुल्कों से कालेधन को प्रभावी तंत्र के जरिये वापस देश में लाना है, क्योंकि यह जनता का धन है।’’ रामदेव मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नर्मदा नदी के सरंक्षण अभियान के तहत चल रही ‘नमामि देवी नर्मदे-सेवा यात्रा’ में शामिल होने अलीराजपुर रवाना होने से पहले भोपाल आये थे। एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक प्रधानमंत्री मोदी से मेरा मोहभंग नहीं हुआ है। मोदी अपने वादों को पूरा करते हैं। उनकी सरकार ने तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है और दो साल का समय शेष है।

इंदौर: लोक सभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने शनिवार को दक्षिण एशियाई देशों का क्षेत्र में शांति के लिए आह्वान किया और कहा कि यह स्थायी विकास के लिए जरूरी है। सुमित्रा ने दक्षिण एशियाई संसदों के सभापतियों के शिखर सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में कहा, ‘शांति, शांति, शांति..होनी चाहिए। तभी विकास होगा।’ पाकिस्तान ने इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। स्थायी विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दो दिवसीय सम्मेलन में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और नेपाल के संसद अध्यक्ष और सदस्य हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत और उसकी संसद एक महत्वाकांक्षी, व्यापक एवं न्यासंगत विकास एजेंडा निर्मित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने को प्रतिबद्ध है जिसमें गरीबी उन्मूलन मूल में होगा।’ उन्होंने अमीर और गरीब के बीच बढ़ते अंतर को कम करने के लिए समावेशी आर्थिक विकास पर जोर देते हुए कहा कि संस्कृति की कीमत पर विकास टिकाउ नहीं होता। उन्होंने भाजपा विचारक दीन दयाल उपाध्याय को उद्धृत करते हुए कहा कि एकात्म मानववाद विकास का आधार है क्योंकि वह स्वदेशी आर्थिक माडल को अपनाता है जो मनुष्य को केंद्र में रखता है। सुमित्रा ने कहा, ‘सबसे पहले और महत्वपूर्ण नागरिक है। कोई भी विकास संभव नहीं और टिकाऊ नहीं जब तक उसका एक मानवीय चेहरा न हो।’

भोपाल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने देशभक्ति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दूसरे की देशभक्ति को मापने का अधिकार किसी को नहीं है। यदि कोई खुद को देश का कर्ताधर्ता माने तो भी वो किसी की देशभक्ति नहीं नाप सकता। पत्रकार विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक ‘भारत की खोज में मेरे पांच साल’ के विमोचन समारोह में भागवत ने शनिवार को यहां कहा, ‘दूसरे की देशभक्ति मापने का अधिकार किसी को नहीं है। किसी को भी नहीं, मुझे भी नहीं। कोई अपने आपको इस देश का कर्ताधर्ता माने तो भी वो किसी की देशभक्ति कितनी है, यह नाप नहीं सकता या नाप कर उस पर बोल नहीं सकता।’ उन्होंने कहा कि हमारी आशा सागर का कोई किनारा नहीं है। ऐसी भक्ति की आंखों से देश को देखने के बाद देश समझ में आता है। इस पुस्तक के लेखों से यह आभास होता कि लेखक द्वारा ऐसी भक्ति की नजर से देश को देखा गया है।

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