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कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट को बड़ी राहत देते हुए पार्टी के तीन बैंक खातों में मौजूद रकम का आंशिक और शर्तों के साथ इस्तेमाल जारी रखने की इजाजत दे दी। यह इजाजत तब दी गई है जब चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने साफ किया कि भारत के चुनाव आयोग का वह आदेश, जिसमें "ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस" नाम और "फूल और घास" चुनाव चिह्न को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है, ममता बनर्जी गुट को खातों पर अधिकार देने वाले कोर्ट के पहले के आदेश पर कोई असर नहीं डालेगा।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि आयोग ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है बल्कि अगले महीने पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनावों के लिए ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर सिर्फ एक अंतरिम आदेश दिया है।

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फूल और घास’ को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ममता बनर्जी की ओर से मामले का सुप्रीम कोर्ट में उल्लेख किया और जल्द सुनवाई की मांग की। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए लगाने का भरोसा दिया।

सिब्बल बोले- चुनाव के बीच फ्रीज किया गया पार्टी का नाम और चिन्ह

मामला कोर्ट के सामने रखते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग ने इस विवाद पर जून में सुनवाई शुरू की थी। ममता बनर्जी गुट ने जुलाई में आयोग के सामने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया था। इसके बाद आयोग ने कई महीनों तक कोई फैसला नहीं लिया। सिब्बल के मुताबिक, जैसे ही पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी हुई, चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने का आदेश जारी कर दिया। दोनों सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले काफी गहमागहमी देखने को मिली। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव से हटने का अपना पहले का फैसला वापस ले लिया है।

इससे पहले रबीउल आलम चौधरी ने मीडिया को बताया था कि वह अपना नामांकन वापस लेने का इरादा रखते हैं। उन्होंने इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं की अनिच्छा और प्रशासनिक दबाव का हवाला दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि यह फैसला ममता बनर्जी से बातचीत के बाद लिया गया था।

हालांकि कुछ ही घंटों में राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया, जब चौधरी ने घोषणा की कि वह पार्टी नेतृत्व की अपील के बाद चुनावी मैदान में बने रहेंगे।

यू-टर्न पर चौधरी बोले- हम ममता बनर्जी के सिपाही

रबीउल आलम चौधरी ने मीडिया से कहा कि इस यू-टर्न की सिर्फ एक ही वजह है, हमारी नेता ममता बनर्जी ने हमें चुनाव लड़ने का निर्देश दिया है। हम ममता बनर्जी के सिपाही हैं, इसलिए हम चुनाव लड़ेंगे।

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया है। आयोग ने इस दल को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता दी है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के गुट ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है और उसे भी इन्हीं तीन राज्यों में राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता दी गई है।

दोनों गुटों ने इससे पहले चुनाव आयोग को अपने-अपने नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प सौंपे थे। एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला ‘मूल लेकिन अल्पमत’ गुट है, जबकि दूसरा पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला ‘बागी लेकिन बहुमत’ गुट है। ममता गुट ने गुरुवार आधी रात के बाद तीन नाम और तीन चुनाव चिह्न के विकल्प आयोग को भेजे थे, जबकि ऋतब्रत गुट ने शुक्रवार सुबह अपने विकल्प सौंपे।

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