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कोलकाता: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शनिवार को शपथ ली। शुभेंदु अधिकारी के साथ आज 5 और लोगों ने शपथ ली है। जिनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक का नाम शामिल है।

राज्यपाल आर. एन. रवि ने यहां ब्रिगेड परेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में शुभेंदु अधिकारी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पांचों मंत्रियों ने शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और सरकार के मंत्रिमंडल के सदस्यों को बधाई दी।

बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है। बीजेपी ने इस शपथ ग्रहण के लिए 9 मई गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की जयंती का खास दिन चुना। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

कोलकाता: ममता बनर्जी को पहले 2021 में नंदीग्राम और फिर 2026 में भवानीपुर में शिकस्त देने के बाद शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के शीर्ष नेता के तौर पर उभरे हैं। अब उन्हें बीजेपी ने बंगाल की जिम्मेदारी सौंप दी है। बतौर मुख्यमंत्री वो राज्य की कमान संभालेंगे। उन्हें विधायक दल के नेता के तौर पर चुना गया है। इसका एलान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया है। बंगाल में राजनीति में बीजेपी का आना, एक बहुत राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

मामला साल 2007 और 2008 से जुड़ा है। यहां नंदीग्राम में इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप की तरफ से एक एसईज़ेड प्रोजेक्ट को लेकर जबरदस्ती जमीन अधिग्रहण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। इसमें भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति यानि बीयूपीसी का नेतृत्व शुभेंदु अधिकारी ने किया। वह इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे। 14 मार्च 2007 को पुलिस फायरिंग हुई। इसमें कम से कम 14 लोग मारे गए थे। तब यह बंगाल की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हुई। इसने 34 साल के वामपंथी शासन को खत्म करने में मदद की।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में 17वीं विधानसभा भंग होने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल नहीं बदली है। वे आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल की 'पूर्व मुख्यमंत्री' बन चुकी हैं, लेकिन सोशल मीडिया प्रोफाइल में अभी भी 'मुख्यमंत्री' का टैग बरकरार रखा है।

ममता ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से किया था इंकार 

ममता बनर्जी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल फेसबुक और 'एक्स' पर अभी भी 'माननीय मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल' का इस्तेमाल कर रही हैं। हार के बावजूद ममता ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इंकार किया था, जिसे वे सोशल मीडिया पर बरकरार रखे हुए हैं।

इससे पहले, गुरुवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने 17वीं विधानसभा को भंग कर दिया। 17वीं विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा हो चुका था। लिहाजा, राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 174 (2)(बी) से प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा को भंग किया।

कोलकाता: ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के बाद राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल बर्खास्त कर दिया। बंगाल चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद राज्यपाल ने ये फैसला लिया है। ये पूरा निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है।

ममता बनर्जी ने नहीं दिया इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार (6 मई 2026) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इंकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम 'जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश' है। साथ ही उन्होंने सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ने और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प लिया।

ममता बनर्जी ने ये भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई चुनाव आयोग से थी, जिसने बीजेपी के लिए काम किया। उन्होंने कहा था, ‘मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है।'

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