ताज़ा खबरें
बिना घुसपैठिया मुद्दा उठाए कौन सा चुनाव लड़ती है बीजेपी?: अखिलेश
ज्ञानेश कुमार को हटवाइए, 30 सेकंड में रुक जाएगा आंदोलन: राहुल
मानहानि मामले में राहुल गांधी बरी, अमित शाह पर टिप्पणी का था केस
जामिया यूनिवर्सिटी में दो दशक बाद छात्र संघ चुनाव कराने का एलान

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के बावजूद तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सीजफायर का उल्लंघन नहीं करने की चेतावनी के बीच ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया है। ईरान ने इस कार्रवाई को अमेरिका की नई सैन्य आक्रामकता के खिलाफ 'निर्णायक जवाब' बताया है।

रातभर चला ऑपरेशन, 8 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

आईआरजीसी के मुताबिक, यह सैन्य अभियान रात करीब 2 बजे से 3 बजे के बीच चलाया गया, जिसमें उसकी नेवी और एयरोस्पेस फोर्स ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। ईरान का दावा है कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए कुवैत स्थित अली अल सलेम एयरबेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय समेत कुल आठ अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और उन्हें तबाह कर दिया गया।

न्यूयॉर्क: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के लिए अमेरिका से एक बुरी खबर आई है। अमेरिका के एक जज ने शुक्रवार को न्याय विभाग (अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस) को भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप वापस लेने के अपने फैसले का स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। जज ने अडानी की कानूनी टीम के मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने के अनुरोध को तत्काल मंजूरी देने से इनकार कर दिया। जज ने अमेरिकी न्याय विभाग से पूछा है कि वे केस क्यों छोड़ना चाहते हैं।

न्याय विभाग ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह इस मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाएगा। बुधवार को अडानी के वकीलों ने ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला जज निकोलस गरौफिस से मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने का अनुरोध किया। जिस पर अपना फैसला सुनाते हुए अमेरिका के पूर्वी न्यूयॉर्क जिले के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज निकोलस गराफिस ने कहा कि न्याय विभाग का बयान बहुत छोटा, साधारण और बिना ठोस आधार वाला है। इससे अदालत को कोई निष्कर्ष निकालने या फ़ैसला करने में मदद नहीं मिलती।

तेहरान: ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख की उस टिप्पणी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने परमाणु स्थल के निरीक्षण की बात कही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे निरीक्षण केवल अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता होने के बाद ही संभव होंगे। गरीबाबादी जापान में आईएईए के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रोसी की ओर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

ईरान ने आईएईए प्रमुख की टिप्पणी पर दिया दो टूक जवाब

ईरान के उप विदेश मंत्री ने पोस्ट किया, ‘‘ग्रोसी के अनुरोध के बावजूद स्विट्जरलैंड में उनके साथ कोई बैठक नहीं हुई। जिन परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला किया गया था या वहां मौजूद परमाणु सामग्री तक पहुंच देने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इन मुद्दों की समीक्षा और उन पर निर्णय केवल अंतिम समझौते के ढांचे के भीतर ही किया जाएगा। साथ ही, यह तभी संभव होगा जब दूसरी ओर से सभी प्रतिबंधों और अन्य दंडात्मक उपायों को समाप्त करने के लिए ठोस एवं व्यावहारिक कदम उठाए जाएं।’’

लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के इस्तीफे को लेकर जारी अटकलों पर विराम लग चुका है। सोमवार (22 जून) को स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद छोड़ने का एलान कर दिया है। स्टार्मर ने कहा, 'मेरा हर फैसला देश की भलाई के लिए था, जिसे मैं बहुत प्यार करता हूं और इसी वजह से मैं अपने पद से हट रहा हूं।' हालांकि, अगला प्रधानमंत्री चुने जाने तक वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

लीडरशिप पर खड़े हुए थे सवाल

लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव के बीच पहले ही इसके कयास लगाए जा रहे थे कि कि वह सोमवार को पद से हटने का एलान कर देंगे, जिससे पार्टी लीडरशिप में होने वाले बदलाव का रास्ता खुल सके। स्टार्मर ने महज दो साल पहले लेबर पार्टी को बंपर चुनावी जीत दिलाई थी। पार्टी को 174 सीटों के साथ बहुमत मिला। उस समय इसे लेबर के लिए एक निर्णायक राजनीतिक वापसी माना गया था, बावजूद इसके, उनका कार्यकाल कई विवादों और नीतिगत बदलावों के कारण लगातार दबाव में रहा।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख