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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष शांति बॉण्ड भरने संबंधी पुलिस के नोटिस को चुनौती दी थी। हालांकि, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने याचिका खारिज करते हुए निर्देश दिया कि कार्यवाही में जिन दस्तावेजों और सामग्री का सहारा लिया गया है, उनकी प्रतियां नेहा बोरा को उपलब्ध कराई जाएं। हाईकोर्ट ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) को भी निर्देश दिया कि जांच पूरी होने के बाद कोई आदेश पारित करते समय आवश्यक सावधानी बरती जाए।

नेहा बोरा ने 17 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धाराओं 126 और 130 तथा धारा 135(3) के तहत जारी किया गया था। नोटिस में उनसे कहा गया था कि जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे 10,000 रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार क्यों न लिया जाए।

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ शुक्रवार को दिल्ली समेत देश के कई शहरों में किसान संगठनों समेत कई छात्र और कर्मचारी-मजदूर संगठनों ने मार्च निकाला। दिल्ली में निर्वाचन आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च निकालने के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इलाके में पहले से निषेधाज्ञा लागू की हुई है।

‘पीपुल अगेंस्ट एसआईआर’ की दिल्ली समन्वय समिति की ओर से आयोजित इस मार्च में छात्रों, युवाओं और किसानों सहित कई संगठनों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी तिरंगा और संगठन के बैनर लेकर मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ‘‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’’, ‘‘एसआईआर रोको’’ और ‘‘वोट चोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे’’ जैसे नारे लगाए।

मार्च में सीपीएम की वरिष्ठ नेता वृंदा करात, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, किसान संगठनों, ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए), ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (एआईडीएसओ) के सदस्य भी शामिल हुए।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता आशुतोष रांका ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उनका विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका, सौरभ दास, राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्न सिंह शुक्रवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। यह कदम दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश होने के लिए एक दिन पहले अतिरिक्त समय मांगे जाने के बाद उठाया गया है।

इन नेताओं को गुरुवार दोपहर राजौरी गार्डन स्थित दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होना था, लेकिन उन्होंने इसके लिए अधिक समय की मांग की थी। पुलिस स्टेशन से बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि हमें अभी अगली तारीख नहीं मिली है। पहली तारीख पर हम नहीं जा पाए थे, जिसकी सूचना हमने दे दी थी।

नई दिल्ली: कांग्रेस ने भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर पर हुए टकराव को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार (23 अक्टूबर) को कहा कि चीन को क्लीन चिट देना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें देश को सच बताना चाहिए। खड़गे ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार से तीन सवाल भी किए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा की बात की है।

'चीन को क्लीन चिट देना बंद कीजिए'

खड़गे ने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए एक्स पर लिखा, 'चीन को क्लीन चिट देना बंद कीजिए। प्रधानमंत्री मोदी को देश के सामने सच सामने लाना चाहिए। उन्हें तीन सवालों के जवाब देने चाहिए।' कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और राजनयिक जवाबदेही से जुड़े सवाल किए हैं।

उन्होंने कहा, 'आईटीबीपी के डीजी ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की सेना के साथ जारी झड़पों की पुष्टि की है, जो कि बेहद चिंताजनक है।

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