ताज़ा खबरें
एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद

मुंबई: नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। पुणे की सेशंस कोर्ट ने 2024 में सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को दाभोलकर की हत्या का दोषी ठहराया था और दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाई कोर्ट से सचिन अंदुरे को भी राहत मिल गई है।

20 अगस्त 2013 को हुई थी दाभोलकर की हत्या

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 67 साल के दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं में शामिल थे। उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की थी। घटना के दौरान मोटरसाइकिल पर आए दो हमलावरों ने उन्हें गोली मारी थी।

2014 में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच एजेंसी ने सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को हत्या का आरोपी बनाया। बाद में विशेष अदालत ने 2024 में दोनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को मुंबई में पार्टी मुख्यालय शिवसेना भवन के बाहर तिरंगा फहराने के बाद कहा कि देश जाग चुका है और कई कोशिशों के बावजूद अब कोई भी हमारे संविधान और नागरिकों की स्वतंत्रता को नहीं छीन सकता है। माना जा रहा है कि उनका यह बयान युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में है।

ठाकरे ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं का समर्थन किया था

उन्होंने कहा, “देश जाग चुका है और अब कोई हमारे संविधान या स्वतंत्रता को छूने की कोशिश नहीं करेगा। कई कोशिशों के बावजूद कोई हमारी स्वतंत्रता नहीं छीन सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम न तो अंदरूनी लोगों के और न ही बाहरी लोगों के गुलाम बनेंगे। जिनके लिए यह संदेश है, हम उन्हें यह संदेश दे रहे हैं।”

ठाकरे ने पिछले दिनों नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन कर रहे युवाओं को शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन दिया था।

छत्रपति संभाजीनगर: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) संयोजक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली में अपने गांव से 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की है। स्वतंत्रता दिवस पर सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके अपने पैतृक गांव पहुंचे और जिला परिषद स्कूल का जायजा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में कोई भी पार्टी रही हो, सरकारी स्कूलों की अनदेखी होती रही है।

दीपके ने निजी स्कूलों में फीस तय करने की मांग की

दीपके ने कहा कि बच्चों को समान अवसर नहीं मिल रहा है और गांवों के स्कूलों की हालत सुधारने के लिए अब सवाल पूछने होंगे। उन्होंने निजी स्कूलों में फीस तय करने की भी मांग की।

दीपके ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी में अपने पैतृक गांव जाने से पहले सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर राजनीतिक दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के ढांचे और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए राजनीतिक दलों ने पर्याप्त काम नहीं किया है।

नई दिल्ली: शिवसेना के नाम और चुनाव निशान 'तीर-कमान' पर अधिकार को लेकर उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के बीच चल रही लड़ाई पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। उद्धव ठाकरे की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें रखते हुए चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल

कपिल सिब्बल ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून की उप-धारा 9 के तहत अगर पार्टी के नाम, मुख्य कार्यालय, पदाधिकारियों या पते में कोई बदलाव होता है तो उसकी सूचना निर्वाचन आयोग को देना अनिवार्य है। हमने निर्वाचन आयोग को सूचित किया था। उस पर भी बेवजह विवाद किया गया। हमने तो अपना कर्तव्य निभाते हुए पदाधिकारियों के नाम दिए थे। वे जानते हैं कि बदलाव हुआ है, इसलिए वे कहते हैं कि हमें बताइए। वे कहते हैं कि वे 2018 के संविधान के बारे में नहीं जानते। लेकिन, संचार में 'शिवसेना पक्ष प्रमुख' का स्पष्ट उल्लेख था।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख