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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की। स्कूल बंद करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुपर स्पेशलिस्ट नहीं बन सकता। दिल्ली में ग्रेप के तहत स्कूलों को बंद करने के फैसले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूल खोलना या बंद करना नीति और विशेषज्ञों का विषय है न कि अदालत का।

दिल्ली प्रदूषण पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

मेनका गुरुस्वामी की ओर से दलील दी गई कि हर बार जब स्कूल बंद किए जाते हैं तो गरीब बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है, ⁠क्योंकि वे मिड-डे मील जैसी सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने कहा,अगर हाइब्रिड व्यवस्था की अनुमति दी जाती है, तो जहां दोनों माता-पिता कामकाजी हैं, वे अपने बच्चों को स्कूल भेजेंगे.

सीजेआई ने स्पष्ट किया, इस फैसले को विशेषज्ञों पर छोड़ना होगा। स्कूल जाना या न जाना, यह अपने आप में एक समस्या बन जाएगा।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर खतरे के स्तर पर पहुंच चुकी है। प्रदूषण के चलते बनते स्वास्थ्य संकट को देखते हुए दिल्ली सरकार ने गाड़ियों और निर्माण गतिविधियों को लेकर सख्त फैसले लागू करने का एलान किया है। इन फैसलों का असर सीधे तौर पर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों, बस सेवाओं और निर्माण से जुड़े कारोबार पर पड़ेगा।

पहले से चल रही बाहरी गाड़ियों पर भी कसेगा शिकंजा

सरकार ने साफ कर दिया है कि 18 दिसंबर की सुबह से दिल्ली की सीमाओं पर सख्ती और बढ़ा दी जाएगी। दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड सिर्फ वही गाड़ियां राजधानी में प्रवेश कर पाएंगी, जो बीएस-6 उत्सर्जन मानक वाले होंगे। बीएस-2, बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी के वाहन, चाहे वे निजी हों या व्यावसायिक, फिलहाल दिल्ली में नहीं आ सकेंगे। दिल्ली में पहले से मौजूद दूसरे राज्यों की गाड़ियों की भी जांच की जाएगी। अगर कोई वाहन तय मानकों से नीचे पाया गया, तो उसे सड़क से हटाकर जब्त किया जाएगा। सरकार का कहना है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे।

नई दिल्ली: दिल्ली में कड़ाके की सर्दी के बीच लोगों को जहरीली हवा से राहत नहीं मिल रही है। बुधवार सुबह की शुरुआत ही धुंध और जहरीली हवा के साथ हुई। सुबह करीब 6 बजे दिल्ली में औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 से ऊपर दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” से लेकर “सीवियर” की श्रेणी में आता है। घर से बाहर निकलते ही आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें आम हो गई हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और मौसम विभाग (आईएमडी) के मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी के कई रिहायशी और औद्योगिक इलाकों में वायु प्रदूषण बेहद चिंताजनक स्तर पर है। खासतौर पर उत्तर और पश्चिमी दिल्ली के इलाकों में हालात ज्यादा खराब नजर आए। बवाना में एक्यूआई 378 दर्ज किया गया, जो सूची में सबसे ऊपर रहा। इसके बाद मुंडका में 371, रोहिणी में 364, जहांगीरपुरी में 363 और वजीरपुर व एनएसआईटी द्वारका में 361 का स्तर रिकॉर्ड किया गया।

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार सुबह एक बार फिर जहरीली धुंध ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। शहर के कई इलाकों में स्मॉग की मोटी चादर देखने को मिली, जिससे न सिर्फ हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हुई बल्कि आम जनजीवन पर भी असर साफ नजर आया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया है।

आईटीओ से लेकर आनंद विहार तक हालात गंभीर

सीपीसीबी के अनुसार, आईटीओ इलाके में एक्यूआई 401 दर्ज किया गया, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। वहीं सराय काले खां क्षेत्र में जहरीली धुंध की मोटी परत छाई रही और यहां एक्यूआई 359 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बहुत खराब’ स्थिति को दर्शाता है। सुबह 6 बजे तक आनंद विहार में एक्यूआई 415 और अशोक विहार में 417 दर्ज किया गया। बवाना में यह 399, जबकि बुराड़ी में 377 रहा। चांदनी चौक का एक्यूआई 388 रिकॉर्ड किया गया।

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