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नई दिल्ली (जनादेश ब्यूरो): दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच का दायरा और तेज कर दिया है। आधी रात को हुए इस बवाल में पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके गए थे, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए। अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) करेगी। मिली जानकारी के अनुसार अब तक करीब 50 लोगों की पहचान की जा चुकी है, जिनकी भूमिका की छानबीन की जा रही है।

राजनीतिक भूमिका की भी होगी जांच

इस मामले में राजनीतिक एंगल की भी जांच की जा रही है। पुलिस के पास एक वीडियो सामने आया है, जिसमें समाजवादी पार्टी के एक सांसद घटनास्थल के आसपास मौजूद नजर आ रहे हैं।

वीडियो की सत्यता की पुष्टि की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हिंसा से पहले और दौरान उनकी मौजूदगी का उद्देश्य क्या था। सूत्रों के मुताबिक, सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी को जांच में शामिल होने के लिए जल्द समन भेजा जाएगा।

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी को लेकर दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। यह मामला सोमवार शाम को जेएनयू के साबरमती ढाबा में एक छात्र सभा के दौरान लगाए गए नारों से जुड़ा है।

भड़काऊ और आपत्तिजनक नारेबाजी की गई

पुलिस ने बताया कि एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 (शांति भंग करने), 353(1) समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी से मंगलवार को वसंत कुंज उत्तरी पुलिस थाने में शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई हुई। पुलिस ने कहा कि जेएनयू प्रशासन द्वारा कानूनी कार्रवाई की मांग के बाद मामला दर्ज किया गया, जिसने नारों को अत्यधिक आपत्तिजनक, उत्तेजक और भड़काऊ बताया था।

नई दिल्ली: साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी गुलफिशा फातिमा उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने पर दिल्ली की एक अदालत द्वारा उसकी रिहाई के आदेश जारी किये जाने के कुछ घंटे बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से बाहर आ गई। बुधवार सुबह जिन तीन अन्य आरोपियों के लिए रिहाई के आदेश जारी किये गए थे, उनके भी सभी प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरा होने के बाद जेल से बाहर आने की उम्मीद है।

इससे पहले दिन में, दिल्ली की एक अदालत ने शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार चारों आरोपियों को 2 लाख रुपये के जमानत बॉण्ड भरने और दो स्थानीय जमानतदार पेश करने के बाद रिहा करने का आदेश जारी किया। पांचवां आरोपी, जिसे सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने जमानत दे दी थी, जमानत बॉण्ड भरने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ। अदालत ने गौर किया कि जमानत की सभी शर्तों का पालन किया गया था और दिल्ली पुलिस द्वारा जमानतदारों और दस्तावेजों की सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद उनकी रिहाई के आदेश पारित किए गए।

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में स्थित शाही जामा मस्जिद के आस पास मौजूद एमसीडी पार्क और अवैध अतिक्रमणों को लेकर सर्वे करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने एमसीडी को दो महीने के भीतर सर्वे करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा है कि अगर कोई अवैध निर्माण पाया जाता है, तो कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाए।

हाई कोर्ट की ओर से ये आदेश एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए दिया गया है। फरहत हसन नामक एक व्यक्ति ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और अतिक्रिमण हटाने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी को दिए निर्देश

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि दिल्ली में शाही जामा मस्जिद के आसपास पार्क और सार्वजिनक जगहों पर हुए अवैध निर्माण का सर्वे करें। सर्वे की रिपोर्ट 2 महीने के अंदर कोर्ट में दाखिल करें और अवैध निर्माण पाए जाने पर नियम और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।

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