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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी वराले की पीठ ने कहा कि वांगचुक की स्वास्थ्य रिपोर्ट ठीक नहीं है और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम नटराज को इस मामले में निर्देश लेने चाहिए। मामले में गुरुवार को भी अदालत में दलीलें पेश की जाएंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक की खराब सेहत का किया जिक्र

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि हिरासत का आदेश 26 सितंबर 2025 को पारित हुआ था, जो लगभग पांच महीने पुराना है। कोर्ट ने कहा, "हिरासत में व्यक्ति की सेहत निश्चित रूप से अच्छी नहीं है। पहले देखी गई रिपोर्ट से भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक दिखती है। उम्र से जुड़े अन्य कारक भी हैं। क्या सरकार इस पर दोबारा विचार कर सकती है?"

नई दिल्ली: केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सोनम वांगचुक लद्दाख में नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि वांगचुक के बयानों से हिंसा भड़कने का खतरा था। सरकार ने आरोप लगाया, 'वांगचुक ने केंद्र सरकार को 'वे' कहकर संबोधित किया, जो अलगाववादी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने जेन जी को गृहयुद्ध और खूनखराबे के लिए उकसाने की कोशिश की।'

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के सामने सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह दलील दी। यह याचिका वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने दायर की है।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, 'वह केंद्र सरकार को 'वे' कहते हैं। यह 'हम' और 'वे' ही एनएसए के तहत हिरासत के लिए पर्याप्त है। इस देश में 'हम' और 'वे' नहीं हैं, हम सभी भारतीय हैं।' मेहता ने आरोप लगाया कि वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसी स्थिति में ले जाना चाहते थे।

जोधपुर: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का शनिवार सुबह एम्स जोधपुर में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। बताया गया कि जेल में उपलब्ध दूषित पानी के सेवन से उन्हें पेट में गंभीर संक्रमण की शिकायत थी, जिसके बाद मेडिकल जांच की आवश्यकता पड़ी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोनम वांगचुक को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जोधपुर सेंट्रल जेल से एम्स लाया गया।

जेल से एम्स तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

सोनम वांगचुक को जेल से एम्स जोधपुर तक ले जाने से पहले पूरे मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। जेल परिसर से लेकर अस्पताल तक अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की गई थी। सोनम वांगचुक को विशेष सुरक्षा बनाकर अस्पताल ले जाया गया। एम्स जोधपुर में सोनम वांगचुक की जांच वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की ओर से की गई। सूत्रों के अनुसार, उनकी पेट संबंधी समस्याओं को देखते हुए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की ओर से विशेष रूप से परीक्षण किया गया। डॉक्टरों ने आवश्यक मेडिकल टेस्ट कर उनकी स्थिति का बारीकी से आकलन किया।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दूषित पेयजल से पेट संबंधी समस्याओं की जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की शिकायत के बाद बृहस्पतिवार को एक विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा उनकी जांच कराने का निर्देश दिया। सोनम वांगचुक जोधपुर केंद्रीय जेल में हिरासत में हैं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने जेल अधिकारियों को वांगचुक की चिकित्सा रिपोर्ट सोमवार तक सीलबंद लिफाफे में उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि जलवायु कार्यकर्ता की तत्काल चिकित्सा जांच के लिए जेल अधिकारियों को निर्देश देने संबंधी एक याचिका दायर की गई है।

जेल में बंद सोनम वांगचुक का कैसा है स्वास्थ्य?

उन्होंने कहा, “दूषित पेयजल की वजह से उनके पेट में दिक्कत हो रही है। वह डॉक्टर से जांच करवाना चाहता है, लेकिन कोई आता नहीं। उनकी साप्ताहिक जांच होने दीजिए और उन्हें वह पानी पीने दीजिए जो हम देते हैं।”

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