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नई दिल्ली: सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने अपनी याचिका में संशोधन करने का फैसला किया है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए अब 29 अक्तूबर की तारीख तय की है। याचिका में गीतांजलि अंगमो ने सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में रखने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने पाया कि जोधपुर जेल के जेलर ने जो हलफनामा दायर किया है, उसमें बताया गया है कि सोनम वांगचुक के बड़े भाई और वकील ने उनसे मुलाकात की है।
सोनम वांगचुक की पत्नी याचिका मेंं करेगी संशोधन
गीतांजलि अंगमो की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वे अपनी याचिका में संशोधन करना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने मांग की कि सोनम वांगचुक को अपनी पत्नी के साथ कुछ लिखित पंक्तियों की अदला-बदली करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की याचिका पर सुनवाई स्थगित करते हुए इसके लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की है। याचिका में जलवायु कार्यकर्ता की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत को चुनौती दी गई है और उनकी तत्काल रिहाई का अनुरोध किया गया है।
अब 15 अक्टूबर को होगी सुनवाई
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने समय की कमी के कारण मामले में सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर (बुधवार) का समय दिया।
आपको बता दें, शीर्ष अदालत ने 6 अक्टूबर को केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को नोटिस जारी किए थे। अदालत ने हिरासत का कारण बताने के अनुरोध वाली उनकी याचिका पर कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और मामले की सुनवाई 14 अक्टूबर तक स्थगित कर दी।
26 सितंबर को वांगचुक को किया था गिरफ्तार
वांगचुक को 26 सितंबर को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था।
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र को चार हफ्ते का समय दिया है।
प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ शिक्षाविद जहूर अहमद भट और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता अहमद मलिक द्वारा दायर याचिकाओं सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें जम्मू कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के केंद्र के आश्वासन पर अमल का आग्रह किया गया है। उन्होंने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र द्वारा केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा दिए जाने के आश्वासन का उल्लेख किया। केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि पिछले साल क्षेत्र में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए थे, लेकिन मौजूदा सुरक्षा चिंताओं और पहलगाम में हुए आतंकवादी हमलों के मद्देनजर राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर सरकार को और समय की आवश्यकता है।
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नई दिल्ली: लद्दाख में पिछले महीने हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिए गए सोनम वांगचुक के समर्थन में अब न्यायिक लड़ाई दिल्ली तक पहुंच गई है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उनके पति को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है और एक सप्ताह से अधिक समय से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही। उनका कहना है कि वांगचुक किसी भी तरह से हिंसक या असंवैधानिक आंदोलन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि केवल लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की लोकतांत्रिक मांग उठा रहे थे।
दो सदस्यीय पीठ करेगी सुनवाई
न्यायालय की सूची के अनुसार, यह याचिका न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की दो सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आएगी। याचिका में कहा गया है कि वांगचुक को न तो किसी वैधानिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया और न ही उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश किया गया है।
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