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नैनीताल: उत्तराखंड में आपदा प्रभावित धराली और हर्षिल में राहत-बचाव का काम जारी है। रविवार को आपदा के छठे दिन हेलीकाप्टर के जरिए राहत एवं बचाव का काम जारी रहा। इस दौरान कुल 185 सहित अब तक कुल 1311 लोगों को निकाला जा चुका है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि संवेदनशील पहाड़ी राज्य में तेजी से हो रहा अनियंत्रित निर्माण अब प्रकृति के लिए खतरे की घंटी बनता जा रहा है।

प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से भरपूर इन पर्वतीय इलाकों में बेतहाशा इमारतों और सड़कों का निर्माण न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ रहा है, बल्कि आपदा का बड़ा कारण भी बन रहा है। नैनीताल स्थित एरीज (एआरआईईएस) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियां पहाड़ों में बादल फटने जैसी घटनाओं को कई गुना बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ों की मिट्टी पहले से ही कमजोर होती है। बड़े पैमाने पर पहाड़ काटकर किए जा रहे निर्माण से मिट्टी की जलधारण क्षमता घट रही है और स्थानीय जलवायु तंत्र असंतुलित हो रहा है। इसका सीधा असर मौसम के पैटर्न पर पड़ रहा है।

नई दिल्ली: उत्तराखंड में एक बार फिर तबाही का मंजर देखने को मिला। उत्तरकाशी के धराली गांव में बादल फटने की वजह से 5 लोगों की मौत हो गई। इस आपदा की सैटेलाइट तस्वीरें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शेयर की हैं। बादल फटने के बाद भयंकर बाढ़ आ गई, जिससे कई इमारतें पानी में डूब गईं। सड़कों पर मलबा भी बिखरा हुआ नजर आया।

इसरो ने धराली की दो सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं। इनमें एक तस्वीर तबाही से पहले की है, जबकि दूसरी तस्वीर तबाही के बाद की है। पहली तस्वीर 13 जून 2024 की है, वहीं दूसरी फोटो 7 अगस्त 2025 की है। हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीर में मलबा फैला हुआ दिखाई दे रहा है। अहम बात यह है कि नदी ने भी अपना रास्ता बदल लिया है। इमारतें पानी में डूबी हुई नजर आ रही हैं। बादल फटने के बाद भयंकर बाढ़ आ गई, जिससे कई लोग लापता भी हो गए।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक इस आपदा को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। मंगलवार (5 अगस्त) दोपहर के बाद आई त्रासदी को उन्होंने आंखों के सामने घटते देखा।

उत्तरकाशी: धराली गांव और हर्षिल स्थित सेना के कैंप में आए मलबे के दूसरे दिन बुधवार को तेजी से जिंदगियों की तलाश शुरू हो गई है। सेना, आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमें हेलिकॉप्टर से खोज और बचाव कार्य में जुटी रहीं। इस दौरान दो शव मिले हैं, जिससे अब मृतकों की संख्या छह हो गई है। वहीं, हर्षिल में मलबे में फंसे 11 जवानों समेत 13 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। जिला प्रशासन के अनुसार सेना के 10 जवान समेत 20 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। वहीं आशंका यह भी है कि यह संख्या और बढ़ सकती है।

10 जवान समेत 20 लोग अभी भी लापता

उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से मची तबाही के बाद बुधवार दोपहर मौसम खुलने पर बचाव अभियान ने जोर पकड़ा। जिला प्रशासन के अनुसार सेना के दो घायल जवानों को हेलिकॉप्टर से हायर सेंटर भेजा गया है। धराली के आठ स्थानीय युवक, नेपाली मूल के दो व्यक्ति और सेना के 10 जवान समेत 20 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। वहीं, आशंका यह भी है कि यह संख्या और बढ़ सकती है।

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली गांव के पास मंगलवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही मची है। इस घटना में भारतीय सेना का हर्षिल कैंप भी प्रभावित हुआ है। सेना के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस हादसे में सेना के करीब 7 से 10 जवानों के लापता होने की सूचना है, जिनकी तलाश के लिए अभियान जारी है। वहीं, इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई है।

सेना के अनुसार, बादल फटने की घटना दोपहर 1:45 बजे धराली गांव के पास हुई, जो कि हर्षिल स्थित भारतीय सेना के कैंप से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर है। घटना के तुरंत बाद इलाके में भारी भूस्खलन और बाढ़ जैसे हालात बन गए, जिससे संचार संपर्क भी टूट गया है। सेना ने बताया कि जैसे ही घटना की जानकारी मिली, राहत और बचाव कार्य के लिए 150 जवानों की टुकड़ी को मौके पर भेजा गया।

सेना की टीमें स्थानीय लोगों की मदद के साथ राहत कार्यों में जुटी हैं। सेना की ओर से कहा गया है, "स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है। भारतीय सेना राहत कार्यों के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।"

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