ताज़ा खबरें
एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद

नई दिल्ली: चुनाव आयोग में जारी मतभेद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानी पर अब बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी आवाज उठाई है। बीजेपी के सहयोगी दलों का कहना है कि ज्ञानेश कुमार को "लोगों के मन में मौजूद शंकाओं को दूर करना चाहिए" और मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

जहां विपक्ष ने पूरे देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं बीजेपी की सहयोगी तेलुगु देशम, लोकजनशक्ति पार्टी (राम विलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस ने 23 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्टर रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट में खुलासा किया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार अधिकारिक तौर पर उन फैसलों और ऐसे निर्देशों पर आपत्ति जताई थी जो उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे जिनमें प्रक्रियाओं की बड़ी खामियां थीं।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई है। यह याचिका मीडिया रिपोर्टों को आधार बनाकर दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े कई अहम फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए थे। मांग की है कि ऐसे सभी फैसलों को गैरकानूनी घोषित किया जाए और मूल फॉर्म-6 को फिर से लागू किया जाए।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि इस बात की एसआईटी जांच कराई जाए कि आखिर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कैसे हटाए गए। याचिकाकर्ता का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना सामान्य बात नहीं है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जनहित याचिका में आरपी एक्ट के तहत ड्यूटी के दौरान किए गए उल्लंघनों के लिए कई अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की भी मांग की गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ मनीष गर्ग, आईएएस एवं डिप्टी ईसी और ईसीआई की आईटी हेड सीमा खन्ना के नाम शामिल हैं।

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। पार्टी ने शुक्रवार को पूरे देश में उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग में ज्ञानेश कुमार मनमानी कर रहे हैं और बाकी दो चुनाव आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे हैं। एक अखबार में हुए खुलासे के बाद कांग्रेस ने देशभर के कई शहरों में एक साथ विरोध प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ की मांग को लेकर कांग्रेस ने दल्ली, गुवाहाटी, चंडीगढ़, मणिपुर, पटना, जम्मू समेत कई शहरों में प्रदर्शन किया। इन सभी शहरों में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और नारेबाजी करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

गुवाहाटी में गौरव गोगोई प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिये गये

गुवाहाटी में इस प्रदर्शन की अगुवाई गौरव गोगोई ने की। यहां प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेड से आगे जाने की कोशिश करने पर कांग्रेस की असम इकाई के प्रमुख गौरव गोगोई और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।

नई दिल्ली: कांग्रेस ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने वर्ष 2024 के बाद से मतदाता सूचियों के एसएसआर को रोककर नई पीढ़ी के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया को प्रभावित किया है।

कांग्रेस ने एसएसआर के मुद्दे पर पीएम मोदी को घेरा

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और प्रधानमंत्री मोदी की तुलना करते हुए कहा, ‘‘एक प्रधानमंत्री ने जेन-जी को वोट का अधिकार दिया, दूसरे ने उसे छीनने की कोशिश की।’’ उन्होंने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने दिसंबर, 1988 में संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन करके मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी थी। उनके मुताबिक, यह ऐसा कदम था जिसने युवाओं को सशक्त किया। संविधान (61वां संशोधन) अधिनियम, 1988 के तहत अनुच्छेद 326 में 21 वर्ष की जगह 18 वर्ष की आयु का प्रावधान किया गया था।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख