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नई दिल्ली: कांग्रेस ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने वर्ष 2024 के बाद से मतदाता सूचियों के एसएसआर को रोककर नई पीढ़ी के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया को प्रभावित किया है।

कांग्रेस ने एसएसआर के मुद्दे पर पीएम मोदी को घेरा

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और प्रधानमंत्री मोदी की तुलना करते हुए कहा, ‘‘एक प्रधानमंत्री ने जेन-जी को वोट का अधिकार दिया, दूसरे ने उसे छीनने की कोशिश की।’’ उन्होंने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने दिसंबर, 1988 में संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन करके मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी थी। उनके मुताबिक, यह ऐसा कदम था जिसने युवाओं को सशक्त किया। संविधान (61वां संशोधन) अधिनियम, 1988 के तहत अनुच्छेद 326 में 21 वर्ष की जगह 18 वर्ष की आयु का प्रावधान किया गया था।

नई दिल्ली: चुनाव आयोग को लेकर हुए खुलासों पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफे का अल्टीमेटम दे दिया है। सीजेपी ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार पर मतदाताओं के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर वह 48 घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू होगा और दिल्ली में ‘‘जंतर-मंतर 2.0’’ भी किया जाएगा।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजधानी दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में ‘धांधली’ की गई है और नागरिकों से मतदान का अधिकार छीना जा रहा है। दीपके ने कहा, ‘‘यदि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं, तो हम दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने से पहले एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।’’ उन्होंने यह भी कहा कि यदि सीईसी इस्तीफा नहीं देते हैं, तो ‘जंतर-मंतर 2.0’ निश्चित रूप से होगा।’’

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद और विवाद की खबरों के बीच गुरुवार को आरोप लगाया कि देश की चुनावी प्रणाली के साथ जो किया गया है वह देशद्रोह है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जांच का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से इस्तीफा देना चाहिए और मामले में गवाह बनना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए

राहुल गांधी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ज्ञानेश कुमार को सबसे पहले तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। ज्ञानेश कुमार को समझना चाहिए कि उनका कृत्य राष्ट्र के खिलाफ है। हम एक ऐसी जगह पर हैं, जहां इससे पहले कभी नहीं थे। भारत में ऐसा पहली बार हुआ है कि देश ऐसे पॉइंट पर आ गया है। ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। आप बहुत पढ़े-लिखे हैं। समझिए कि क्या हो रहा है। आपने जो किया है वह भारत के खिलाफ है आपको वोटों की रक्षा करनी चाहिए थी।"

नई दिल्ली: वाम दलों ने निर्वाचन आयोग से जुड़े विवाद के बीच बृहस्पतिवार को कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के साथ मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।

वाम दलों ने सीईसी चयन समिति पर भी उठाए सवाल

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव एम ए बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव डी राजा और सीपीआई (माले)-लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने एक संयुक्त बयान में यह भी कहा कि दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियों से निर्वाचन आयोग के कामकाज और उसकी स्वतंत्रता को लेकर ‘‘गंभीर सवाल’’ खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग से जुड़े खुलासों से विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों द्वारा पहले उठाई गई चिंताओं को बल मिलता है तथा यह दावा कमजोर होता है कि एसआईआर और मतदाता सूची का प्रबंधन पारदर्शी और विकेंद्रीकृत है।

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