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टोक्यो: जापान में रहने वाले जापानी नागरिकों की कुल आबादी इस साल एक जनवरी तक घटकर 119,736,483 रह गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 42 साल बाद पहली बार यह संख्या 120 मिलियन से नीचे पहुंची है। मिनिस्ट्री ऑफ इंटरनल अफेयर्स एंड कम्युनिकेशंस के डेटा मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में जापानी नागरिकों की संख्या में 917,000 की कमी आई है। 1968 से जब इस तरह के आंकड़े दर्ज किए जाने लगे, तब से यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है।

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, जापान के 47 प्रांतों में केवल टोक्यो ऐसा प्रांत रहा, जहां जापानी नागरिकों की संख्या में 0.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वहीं, जापान में रहने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 4,031,159 हो गई है। पिछले साल के मुकाबले इसमें 354,000 की बढ़ोतरी हुई है। 2013 में गिनती शुरू होने के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

तेहरान: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिका के एक सैन्य एयर बेस और अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुख्यालय पर हमला किया है। यह जानकारी स्थानीय मीडिया में दी गई।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है। उसके मुताबिक, उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में अमेरिकी एयर बेस और सेंटकॉम के मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। आईआरजीसी ने कहा कि जब तक अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ 'धमकियां, गैरकानूनी और दुश्मनी भरे कदम' उठाए जाते रहेंगे, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा। यह ताजा हमला पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े तनाव के बीच हुआ है।

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार (28 जुलाई) को डोनाल्ड ट्रंप से मिलने पहुंचे। राष्ट्रपति ट्रंप और नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में लंबी मीटिंग चली। इस दौरान दोनों के बीच युद्ध समेत कई मसलों पर बातचीत हुई। दावा किया जा रहा है कि इस मीटिंग में नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ नई सीक्रेट जानकारी शेयर की है, जो कि ईरान के लिए सिरदर्द बन सकती है।

नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप को क्या बताया

इजरायल के 'चैनल 12' की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू का मानना है कि इजरायल को ईरान के खिलाफ एक बार फिर से आक्रामक हमला करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में एक सीनियर अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि नेतन्याहू का मानना है कि ईरान पर दोबारा हमला करना ही आखिरी विकल्प है। इसके बिना शांति नहीं आएगी। इजरायल अब उन जगहों को टारगेट करेगा, जहां अभी तक एक बार भी अटैक नहीं किया गया है।

वॉशिंगटन: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने मंगलवार, 28 जुलाई को उस प्रतिबंध (सैंक्शन) वाले बिल पर आगे चर्चा की मंजूरी दे दी, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। अगर यह बिल आगे चलकर प्रतिनिधि सभा से भी पास हो जाता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

सीनेट में इस बिल पर आगे बहस शुरू करने के पक्ष में 86 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 12 सांसद इसके विरोध में रहे। इस वोटिंग के साथ बिल ने अपनी पहली संसदीय प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब इस पर विस्तृत चर्चा होगी और उसके बाद अंतिम मतदान कराया जाएगा। बिल में रूस के अधिकारियों, बड़े अमीर कारोबारियों (ओलिगार्क), वित्तीय संस्थानों और उस तथाकथित "शैडो फ्लीट" पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जिसका इस्तेमाल रूस अपने तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है।

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