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वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्थिक मोर्चे पर ईरान की कमर तोड़ने का एलान किया है। साथ ही तेहरान का साथ देने वाले देशों को भी अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप के एलान पर ईरान ने कहा कि वो दबाव में नहीं आने वाले हैं।

समाचार एजेंसी तस्नीम ने इन कदमों को वॉशिंगटन के नाकाम अधिकतम दबाव अभियान का ही एक हिस्सा बताया। ट्रंप की बातों को बड़ी-बड़ी और बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें बताते हुए तस्नीम ने कहा कि पहले लगाए गए प्रतिबंध ईरान का व्यवहार बदलने में नाकाम रहे हैं और देश ने विदेशी व्यापार और वित्तीय पाबंदियों से बचने के तरीके काफी पहले ही सीख लिए हैं।

वहीं, फार्स समाचार एजेंसी ने ट्रंप के दावों को भ्रमपूर्ण बताते हुए उन्हें बार-बार किए जाने वाले प्रोपेगैंडा का हिस्सा करार दिया। फार्स ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के जल्द पतन और सैन्य तबाही के दावे बार-बार किए हैं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने अदियाला जेल में कैद देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सही उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मंगलवार को आदेश सुनाया। फैसले के तहत जेल में बंद इमरान खान को अगले कुछ दिनों में पूरी मेडिकल जांच के लिए इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाएगा।

परिवार से हर हफ्ते मुलाकात की भी मिली इजाजत

जस्टिस शाहिद वहीद की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों वाली बेंच ने यह आदेश पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) संस्थापक इमरान खान को अस्पताल में भर्ती कराने और उनके परिवार से मिलने की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। पाकिस्तान के जाने-माने अखबार डॉन ने वहीद के हवाले से कहा, "मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए, हम कैदी की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह आदेश जारी कर रहे हैं।"

तेहरान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि ईरान ने पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बताए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ हालिया शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) ‘सम्मान’ और ‘ताकत’ के साथ किया। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते को मजबूती से आगे बढ़ाया और अपने दुश्मनों के सामने घुटने नहीं टेके।

पेजेश्कियन ने रविवार को शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी की मौजूदगी में हुई एक बैठक में यह बयान दिया। उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति ने 18 जून को ईरान और अमेरिका के बीच क्षेत्र में युद्ध खत्म करने के लिए हुए एमओयू का बचाव किया।

विशेषज्ञों से चर्चा के बाद तैयार हुआ था एमओयू

सिन्हुआ के मुताबिक, पेजेश्कियन ने कहा कि समझौते को लेकर विशेषज्ञों के साथ विस्तार से चर्चा की गई थी। उनके अनुसार, एमओयू को सोच-समझकर तैयार किया गया और ईरान ने इसे मजबूती से आगे बढ़ाया।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर ड्रोन के मामले में अमेरिका की निर्भरता घटाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने बाहर से आयात होने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100% तक टैरिफ लगाने का एलान किया है। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और ड्रोन की सप्लाई चेन में चीन के दबदबे को कम करने के मकसद से लिया गया है। हालांकि, इसका असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहेगा। भारत से अमेरिका जाने वाले कमर्शियल और छोटे ड्रोन भी 25% टैरिफ के दायरे में आएंगे।

संवेदनशील ड्रोन पर 100%, छोटे ड्रोन पर 25% टैरिफ

व्हाइट हाउस के मुताबिक, 100% तक का टैरिफ उन संवेदनशील ड्रोन और उनके पार्ट्स पर लगाया जाएगा, जिनका वजन 25 किलोग्राम से ज्यादा है या जिनमें थर्मल इमेजिंग जैसी एडवांस सुरक्षा तकनीक मौजूद है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में नहीं आने वाले छोटे ड्रोन पर 25% का कम टैरिफ लगाया जाएगा। नए टैरिफ में ज्यादातर प्रावधान 3 सितंबर से लागू होने वाले हैं।

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